[ad_1]
ऐप पर पढ़ें
India alliance in UP: कई राज्यों में इंडिया गठबंधन को लगातार मिल रहे झटके के बाद अब यूपी में यह गठबंधन कुछ बेहतर स्थिति में दिख सकता है। अखिलेश यादव ने जिस तत्परता से शुरूआती 11 सीटों के साथ कांग्रेस को जो ऑफर दिया उसे कांग्रेस ने अभी न स्वीकारा और न नकारा है। चाहे सपा हो या कांग्रेस दोनों के लिए इंडिया गठबंधन के जरिए एकजुट रहकर चुनावी जंग में कूदना जरूरी भी बन गया है मजबूरी भी। एक ओर बिहार के ताजा राजनीतिक झंझावत से सपा कांग्रेस दोनों में बेचैनी है। पहले बात कांग्रेस की।
पश्चिम बंगाल, पंजाब की सत्ताधारी पार्टियों ने कांग्रेस से तालमेल से इंकार कर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इससे कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो गईं हैं। वहीं बिहार में भी सत्ताधारी जद यू ने अपना अलग रास्ता पकड़ लिया है और वह भाजपा के हमसफर बनने की तैयारी में है। ऐसे में कांग्रेस के लिए इंडिया गठबंधन बनाए रखना और उसे मजबूती देकर चुनाव लड़ाना बड़ी चुनौती है। इससे पार पाने के लिए अब कांग्रेस के सामने यूपी में मौका है कि वह सपा से समझौता कर गठबंधन बचाए।
कांग्रेस को पता है कि यहां अगर सपा से गठजोड़ नहीं हुआ तो उसे अकेले ही चुनाव में जाना होगा। बसपा ने भी अकेले लड़ने का ऐलान कर रखा है। यह कांग्रेस के लिए विकट स्थिति होगी। भले ही कांग्रेस सपा के 11 सीट के आफर पर उत्साह न दिखाए पर उसके सामने ज्यादा विकल्प अब बचे नहीं हैं। सपा के पास वैसे तो रालोद व छोटे दलों के साथ गठबंधन पहले से है लेकिन कांग्रेस के साथ जुड़ने से सपा को कुछ सीटों पर फायदा होगा। कांग्रेस दलित व मुस्लिम वोटों में कुछ सेंध लगा सकती है। दूसरे सपा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के यूपी से किसी सीट से चुनाव लड़ने की सूरत में कुर्मी वोटों के गठबंधन में आने की उम्मीद लगाई थी। लेकिन अब पासा पलट चुका है। कांग्रेस से गठजोड़ करने से सपा को दूसरे राज्यों में अपने पांव पसारने का मौका मिल सकता है।
[ad_2]
Source link