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वॉशिंगटन: कभी तेल के लिए एक सदी से भी अधिक समय तक देशों के बीच संघर्ष, तमाम तरह की कूटनीति और गठजोड़ चलते रहे. ताकतवर देश और ताकतवर होने के लिए तेल पर कब्जा कर लेना चाहते थे. लेकिन 21वीं सदी की शुरुआत होते होते तेल की धार पतली होने लगी और इसकी जगह ले ली सिलिकॉन के एक छोटे से टुकड़े ने. जो आज करीब 500 अरब डॉलर के उद्योग का केंद्र है और 2030 तक शायद बढ़कर दोगुना हो जाएगा. यह है चिप का बाजार. अब इसमें एक चीज और शामिल हो गई है एआई चिप. जिस पर दुनिया की दो ताकतवर अर्थव्यवस्था अपना कब्जा रखना चाहती हैं. खास बात यह है कि इस चिप की सप्लाई चेन पर जिसका नियंत्रण होगा वही देश महाशक्ति बनने की होड़ में अव्वल होगा. और इस होड़ में दो देश चीन और अमेरिका के बीच तनाव अब मुखर रूप लेता जा रहा है.
दो देशों की लड़ाई में उलझीं कंपनियां
इसके तहत अब अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई चिप चीन को निर्यात किए जाने पर नए नियम लागू करने पर विचार कर रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक चिप निर्माण की प्रमुख कंपनी जैसे Nvidia में 2 फीसद और Advanced Micro Devices (AMD) के शेयरों में 1.5 फीसद गिरावट दर्ज की गई है.
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रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्तीय विभाग Nvidia सहित अन्य कंपनियों द्वारा निर्मित चिप को जुलाई से चीन के ग्राहकों के शिपमेंट पर रोक लगा देगा. Nvidia, Micron, और AMD वो चिप निर्माता कंपनी हैं जो चीन और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में उलझ कर रह गई हैं. सितंबर में Nvidia ने कहा था कि अमेरिकी अधिकारियों ने कंपनी को चीन को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जुड़े काम के लिए दो शीर्ष कंप्यूटिंग चिप्स का निर्यात रोकने के लिए कहा गया था.
पहले लाइसेंस फिर चिप का निर्यात
बाद में Nvidia ने निर्यात नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालने करने के लिए वह नई आधुनिक चिप A800 को पेश करेगी. कंपनी ने नियमों को बरकरार रखने के लिए इस साल की शुरुआत में H100 में भी बदलाव किया था. लेकिन अब रिपोर्ट बता रही है कि जिन नए प्रतिबंधों पर विचार किया जा रहा है उसके तहत विशेष अमेरिकी लाइसेंस के बगैर A800 चिप्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाएगा.
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Tags: China, United States (US), United States of America
FIRST PUBLISHED : June 28, 2023, 12:33 IST
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