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अंकित राजपूत/जयपुर. वैसे तो राजस्थान अपने तीखे व चपटपटे व्यंजनों के लिए पूरे विश्व में मशहूर है. लेकिन, यहां की मिठाइयों का भी जवाब नहीं. यहां कई मिठाइयां तो ऐसी हैं कि जिनका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है और ये केवल यहीं बनती हैं. एक ऐसी ही मिठाई है, जिसे मिठाई न कहकर हम मीठी रोटी भी कह सकते हैं, जिसे सब्जी, तीखी मिर्च और खीर के साथ खाया जाता है. इस मिठाई का नाम है मालपुए.
मालपुए बनने की शुरुआत जयपुर के गोनेर कस्बे से हुई थी और जो अब पूरे देश भर में प्रसिद्ध है. जयपुर से 25 किलोमीटर दूर गोनेर कस्बे में करीब 70-80 दुकानें हैं? जहां मालपुए बनाए जाते हैं. ऐसी ही एक दुकान है ताम्बी मालपुआ की दुकान. यह दुकान 80 साल पुरानी है, जिसे अब तीसरी पीढ़ी संभाल रही है. दुकान संचालक दिनेश ताम्बी बताते हैं कि इस कस्बे में 500 साल से मालपुए बन रहे हैं.
क्यों हैं मालपुआ इतना प्रसिद्धय़
गोनेर के जगदीश महाराजा को मालपुआ का ही भोग लगाया जाता हैं. इस कारण यह भगवान के प्रसाद के रूप में फेमस हो गया. गोनेर में आपको मालपुए हर समय खाने के लिए तैयार मिल जाएंगे और पैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है. शादियों और अन्य पारिवारिक, सामाजिक कार्यक्रमों में मालपुआ की डिमांड रहती हैं. इसलिए मालपुआ इतना प्रसिद्ध है. यहां का मालपुआ जयपुर और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में जाता है. गोनेर में होने वाली सवामणीयों और धार्मिक कार्यक्रमों में मालपुआ के साथ तड़का दाल, मिर्च के टपोरे और खीर बहुत का भी प्रचलन है. जिससे मालपुआ के स्वाद में चार चांद लग जाते हैं.
इस तरह बनता है मालपुआ
मालपुआ गेहूं के सादे आटा और दूध के मीठे घोल से बनता हैं, जिसे शुद्ध देसी घी में एक बड़े आकार की कढ़ाई में कुछ मिनटों तक तला जाता हैं. ठीक से पकने के बाद इसे फिर शक्कर की मीठी चाशनी में डाल कर डूबोया जाता हैं. कुछ मिनटों में इसे चाशनी से बाहर निकाल कर एक बड़े बर्तन में रखा जाता हैं.
क्या है कीमत?
मालपुआ बनानें में ज्यादा समय नहीं लगता मालपुआ देसी घी के अलावा तेल में भी बनता हैं और वह भी स्वादिष्ट होता हैं.शुद्ध देसी घी के मालपुआ 200 रुपये किलो और तेल के मालपुआ 100 रुपये किलो मिलते हैं.
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FIRST PUBLISHED : July 13, 2023, 10:47 IST
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