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Parenting, इस समय ज्यादातर बच्चों के रिजल्ट आने का समय चल रहा है. ऐसे में किसी भी छात्र के कम नंबर आना या फेल हो जाना किसी भी छात्र के लिए मानसिक रूप से बहुत बड़ा झटका हो सकता है. लेकिन यह जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि एक मोड़ है जहां सही मार्गदर्शन, सहयोग और समझदारी से भविष्य को और बेहतर बनाया जा सकता है. तो इस बात से घबराना नहीं चाहिए. क्योंकि जब हम गिरते हैं, तो कुछ बेहतर करने के लिए ही. तो फिर से उठिए, और कुछ बेहतर कीजिए.
यहां पेश हैं मनोवैज्ञानिकों की सलाह, जो छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए जरूरी हैं:
छात्रों के लिए सलाह:
1. नंबर से खुद की वैल्यू तय न करें
कम अंक आपकी मेहनत या क्षमता का पूरा प्रतिबिंब नहीं होते है. हर किसी की सीखने की शैली अलग होती है. तो आप इसको हार न समझें.
2. खुद को दोष देना बंद करें
अपने आप को कोसने के बजाय यह सोचें कि आगे क्या सुधारा जा सकता है, आत्मग्लानि से उबरें. आगे और बेहतर करने की कोशिश करें.
3. गाइडेंस लें, विकल्प तलाशें
रिजल्ट चाहे जैसा भी हो, आपके पास कई करियर ऑप्शन्स हो सकते हैं. जैसे स्किल बेस्ड कोर्स, री-एग्जाम, ओपन स्कूल, ITI, वगैरह.
4. अपनों से बात करें
अपने माता-पिता, टीचर या किसी काउंसलर से बात करें. मन की बात कहने से बोझ हल्का होता है. जिससे आपको अच्छा लगेगा.
5. लक्ष्य फिर से तय करें
कभी-कभी असफलता आपको नए और बेहतर रास्तों पर ले जाती है. खुद को समय दें, और नया प्लान बनाएं.
अभिभावकों के लिए जरूरी बातें:
1. फटकारें नहीं, बात करें
हालांकि माता-पिता को भी दुख होता है. लेकिन बच्चों को डांटने या शर्मिंदा करने की बजाय उन्हें सुनें. वे पहले से ही तनाव में होते हैं.
2. भावनात्मक समर्थन दें
बच्चे को बताएं कि आप उसके साथ हैं. उसकी काबिलियत पर विश्वास जताएं. जिससे उसे अच्छा लगेगा.
3. मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें
बच्चा अगर चुपचाप है, अकेलापन पसंद कर रहा है, या रोता है. तो तुरंत काउंसलिंग की सलाह लें.
4. वैकल्पिक रास्तों की जानकारी रखें
हर बच्चा IIT या डॉक्टर नहीं बनता. कला, खेल, स्किल डेवेलपमेंट, कई रास्ते हैं जो आगे चलकर बेहतर करियर बना सकते हैं.
5. अपेक्षाओं का बोझ न डालें
बच्चों पर अपने अधूरे सपने मत थोपें. उन्हें वो बनने दें जो वे बनना चाहते हैं.
याद रखें:
1. असफलता एक स्टॉप है, मंज़िल नहीं.
2. समय के साथ बच्चा दोबारा खड़ा हो सकता है, बशर्ते उसे समझदारी से संभाला जाए.
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