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Entrance Direction: जब भी हम अपने घर से बाहर निकलते हैं या अंदर आते हैं, तो एक चीज़ हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं वो है हमारा घर का मुख्य द्वार. यह सिर्फ एक दरवाज़ा नहीं होता, बल्कि एक रास्ता होता है, जो ऊर्जा को आपके जीवन में आने या उससे बाहर जाने का मौका देता है. कई बार आपने महसूस किया होगा कि कुछ घरों में घुसते ही मन हल्का और शांत हो जाता है, जबकि कुछ जगहें आपको अनचाही थकान दे देती हैं. इसका सबसे बड़ा कारण होता है उस घर का प्रवेश द्वार यानी एंट्रेंस. आइए जानते हैं विस्तार से इंदौर निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह से.
एंट्रेंस हमारे घर की पहली झलक होती है. यह न केवल आने-जाने का रास्ता है, बल्कि यही वह जगह है जो बाहरी दुनिया की सारी ऊर्जा को अपने साथ लाती है. जब हम घर से बाहर निकलते हैं, तो हमारे साथ दिनभर की परेशानियां, खुशियां, गुस्सा या तनाव सब होते हैं. और जब हम वापस लौटते हैं, तो यही सब कुछ साथ लेकर घर के अंदर भी आता है.
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इसलिए ज़रूरी है कि आपका एंट्रेंस साफ़-सुथरा और सलीके से सजा हो. कई लोग बाहर डस्टबिन रख देते हैं, चप्पलें बिखरी होती हैं, या शो रैक गंदे पड़े होते हैं. यह सब चीजें नकारात्मकता को बुलावा देती हैं. वहीं अगर आप एंट्रेंस पर साफ-सुथरा पौधा रखें, सुंदर दीया जलाएं, या एक आकर्षक वेलकम बोर्ड लगाएं, तो इससे माहौल खुद-ब-खुद बदलने लगता है.
रोशनी का भी एंट्रेंस पर बड़ा असर होता है. एक हल्की, गरम रोशनी न सिर्फ वातावरण को सुखद बनाती है, बल्कि सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देती है. कोशिश करें कि एंट्रेंस पर अंधेरा न हो, और अगर संभव हो तो वहां एक हल्का सा म्यूजिक या घंटी की आवाज हो तो अच्छा रहेगा.
घर के अंदर घुसते ही जो दृश्य सामने आता है, वो भी बहुत मायने रखता है, अगर सामने दीवार पर कुछ ऐसा दिखे जो आपको सुकून दे जैसे परिवार की हँसती मुस्कुराती तस्वीरें, या कोई पेंटिंग जो शांति का संदेश दे तो वो पूरे दिन की थकान को कुछ पल में ही दूर कर सकता है.
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एंट्रेंस को लेकर एक बात हमेशा याद रखें यह सिर्फ एक वास्तुशिल्प का हिस्सा नहीं है, यह आपके जीवन का “पहला पड़ाव” है, जहाँ से हर दिन की शुरुआत होती है. यदि आप इसे सही तरीके से सजा पाते हैं, तो नकारात्मकता खुद ही दूर रहने लगती है.
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