Home Health आपकी प्रेगनेंसी खतरे में? एक्सपर्ट ने बताए वे कारण, हर महिला को जानना ज़रूरी!

आपकी प्रेगनेंसी खतरे में? एक्सपर्ट ने बताए वे कारण, हर महिला को जानना ज़रूरी!

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आपकी प्रेगनेंसी खतरे में? एक्सपर्ट ने बताए वे कारण, हर महिला को जानना ज़रूरी!

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Premature Delivery & Pregnancy: रीवा के विघ्नहर्ता हॉस्पिटल की डॉक्टर शैलजा सोनी बताती हैं कि प्रीमैच्योर बर्थ यानी समय से पहले प्रसव कई जोखिमों से जुड़ा होता है. यह अनेक कारणों से हो सकता है, जैसे बीमारी, उम्र…और पढ़ें

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समय से पहले पैदा होने वाले बच्चे रह सकते हैं हमेशा रह सकते हैं बीमार.

हाइलाइट्स

  • समय से पहले जन्मे बच्चे बीमार रह सकते हैं.
  • प्रीमैच्योर बर्थ के कई कारण हो सकते हैं.
  • सावधानियों से प्री-टर्म बर्थ का खतरा कम हो सकता है.

रीवा. रीवा के विघ्नहर्ता हॉस्पिटल में कई वर्षों से सेवाएं दे रही डॉक्टर शैलजा सोनी बताती हैं कि प्रेगनेंसी में सामान्यतः 9 महीने (40 सप्ताह) का समय लगता है. यदि बच्चे का जन्म 37 सप्ताह से पहले होता है तो उसे प्रीमैच्योर बर्थ कहा जाता है, जबकि 40 सप्ताह पूरे होने पर जन्म लेने वाले बच्चों को फुल-टर्म बेबी कहा जाता है. समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, और कुछ मामलों में यह समस्याएं जीवन भर बनी रह सकती हैं.

प्री-मैच्योर बर्थ के कारण
कुछ महिलाओं में प्री-टर्म लेबर की संभावना अधिक होती है और इसके कई कारण हो सकते हैं. हालांकि, अधिकांश मामलों में डॉक्टरों के लिए यह बताना मुश्किल होता है कि किसी महिला को कब लेबर पेन शुरू होगा या उसे प्री-मैच्योर डिलीवरी के लिए तैयार रहना चाहिए.

प्री-मैच्योर बर्थ के जोखिम बढ़ाने वाले कारण
कोई पुरानी बीमारी या हेल्थ कंडीशन.
इससे पहले प्रीटर्म लेबर हो चुका हो.
जुड़वा या 2 से अधिक बच्चों का गर्भ में होना.
पारिवारिक कारण जैसे मां या बहनों में प्रीमैच्योर बर्थ की घटनाएं.
दूसरे या तीसरे ट्राईमेस्टर में वजाइनल ब्लीडिंग होना.
पोषण और आराम की कमी.
बहुत देर तक खड़े रहकर काम करना.

35 वर्ष से अधिक उम्र वाली और 17 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में प्रीमैच्योर बर्थ का खतरा अधिक होता है.
हानिकारक केमिकल्स के सम्पर्क में आना.
प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक या बहुत कम वजन होना.
प्रेगनेंसी में सही तरीके से वेट गेन ना होना.
पिछले बच्चे के जन्म के बाद 18 महीनों में गर्भधारण करना.
आईवीएफ की मदद से प्रेगनेंसी में प्री-मैच्योर बर्थ की संभावना अधिक होती है.
किसी दवा का गलत तरीके से सेवन करना, शराब पीना या ड्रग्स लेना.

इन बीमारियों में भी बढ़ता समय-पूर्व प्रसव का खतरा
एनिमिया.
गर्भाशय या सर्विक्स से जुड़े इंफेक्शन्स.
यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन.
वजाइनल इंफेक्शन्स.
गोनोरिया या अन्य सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन्स.
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी लाइफस्टाइल डिजिजेज.
थायरॉइड.
प्रीक्लेम्पसिया.
ब्लड क्लॉटिंग डिसॉर्डर्स.

प्रीमैच्योर बर्थ से बचाव के उपाय
एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्री-टर्म बर्थ को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है, लेकिन कुछ सावधानियों से इसके खतरे को कम किया जा सकता है. अपने सभी टेस्ट और स्क्रीनिंग समय पर कराएं और डॉक्टर के साथ कंसल्टेशन सेशन्स को मिस ना करें. डॉक्टर की सलाह के अनुसार एहतियात बरतें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर डॉक्टर को सूचित करें. यदि आप डायबिटीज, हाई बीपी, डिप्रेशन या अन्य किसी बीमारी से पीड़ित हैं तो उनके प्रबंधन के लिए सही उपाय अपनाएं और उन्हें गम्भीर होने से रोकें.

प्रेगनेंसी के दौरान सिगरेट ना पीएं और शराब का सेवन ना करें. गर्भावस्था में अपनी डाइट पर विशेष ध्यान दें और हेल्दी फल, सब्जियों, डेयरी प्रॉडक्ट्स, अंडे और होल ग्रेन का सेवन अपनी डाइटिशियन की सलाह के अनुसार करें. प्रेगनेंसी में हेल्दी वेट गेन करें. इंफेक्शन्स और मौसमी बीमारियों से बचें. पालतू जानवरों से दूर रहें और उनकी गंदगी साफ ना करें. हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें, खुश रहें और तनाव को कंट्रोल करें.

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