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पवार फैमिली और ठाकरे परिवार की सियासी कहानी लगभग समान है। दोनों ही परिवार के मुखिया ने अपने-अपने भतीजे के दम पर सियासत की है। जब बगडोर सौंपने या फिर उत्तराधिकारी चुनने की बारी आई तो अपने बेटे को चुना।
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