Home Health एंटीऑक्सीडेंट का पॉवर हाउस है यह अनाज, कैंसर, डायबिटीज समेत कई बीमारियों का काल!

एंटीऑक्सीडेंट का पॉवर हाउस है यह अनाज, कैंसर, डायबिटीज समेत कई बीमारियों का काल!

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एंटीऑक्सीडेंट का पॉवर हाउस है यह अनाज, कैंसर, डायबिटीज समेत कई बीमारियों का काल!

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सिमरनजीत सिंह/शाहजहांपुर: रामदाना जिसको मोटे अनाज के तौर पर भी जाना जाता है. रामदाना में कई विटामिन और पोषक तत्व पाए जाते हैं. हमारे शरीर के लिए आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट की करीब 70 प्रतिशत पूर्ति रामदाना करता है. इसके अलावा रामदाना में कई औषधीय गुण छुपे हुए होते हैं. रामदाना हड्डियों को मजबूती देने के साथ-साथ बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है. इसमें पाए जाने वाले फाइबर की वजह से यह पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है.

कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर की गृह विज्ञान की वैज्ञानिक डॉ. विद्या गुप्ता ने बताया कि रामदाना में उच्च क्वालिटी का फाइबर, प्रोटीन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इतना ही नहीं इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं. जिसकी वजह से यह कई बीमारियों से निजात दिलाता है.

कैंसर को मात देता है रामदाना

रामदाना में कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं. इसके अलावा यह मधुमेह और दिल की बीमारियों से भी राहत देता है. रामदाना में पाए जाने वाले फाइबर की वजह से यह पेट के लिए बेहद अच्छा माना जाता है. नियमित सेवन करने से पेट की सूजन से छुटकारा मिलता है.

ऑस्टियोपोरोसिस से दिलाएगा राहत

रामदाना में पाई जाने वाले फास्फोरस और कैल्शियम की वजह से यह हड्डियों की बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस से भी राहत देता है. रामदाना से हड्डियों को मजबूती मिलती है. इसके अलावा यह आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है.

व्रत में ही नहीं दैनिक आहार में शामिल करें रामदाना

डॉ. विद्या गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर रामदाना का सेवन व्रत के दौरान किया जाता है. लेकिन अगर इसको दैनिक आहार में शामिल कर लिया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए बेहद ही फायदेमंद होगा. रोजाना एक स्वस्थ व्यक्ति 15 से 20 ग्राम रामदाना का सेवन कर सकता है.

ऐसे करें रामदाना का सेवन

रामदाना जिसको सबसे पुराना खाद्यान्न माना जाता है. रामदाना के लड्डू बनाकर, पूड़ी बनाकर, हलवा बनाकर, पकौड़ी बनाकर या फिर इसको भूनकर इसकी चिक्की भी बनाई जा सकती है. इतना ही नहीं रामदाना की हरी पत्तियों का साग बनाकर या फिर पराठा बनाकर भी सेवन किया जा सकता है.

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