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MLA का कहना है कि अगर शिंदे ने उद्धव ठाकरे को नहीं छोड़ा होता, तो वह आज जिंदा नहीं होते। उन्होंने कहा, ‘गढ़चिरोली के संरक्षक मंत्री के तौर पर शिंदे ने नक्सलियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था।
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