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नई दिल्ली. दो पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्तों (सीईसी) ने शुक्रवार को कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने का विचार अच्छा है, लेकिन इस लंबी-चौड़ी प्रक्रिया का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए कानूनी खाका तैयार किया जाना बेहद जरूरी है. एक पूर्व सीईसी ने कहा कि निर्वाचन आयोग के लिए एक साथ चुनाव कराना सुविधाजनक और तार्किक है. वहीं, अन्य ने कहा कि अलग-अलग समय पर चुनाव कराने की प्रक्रिया में भी कोई दिक्कत नहीं है.
तीस जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक निर्वाचन आयोग का नेतृत्व करने वाले एस. वाई. कुरैशी ने कहा, ‘‘लोकतंत्र का त्योहार गरीबों का त्योहार है क्योंकि वोट ही उनके पास एकमात्र शक्ति है.’’ तेईस जनवरी 2018 से एक दिसंबर 2018 के बीच सीईसी रहे ओ.पी. रावत ने कहा, ‘‘यह संभव है और किया जा सकता है. आपको बस एक रोडमैप बनाने और उसके अनुसार काम करने की जरूरत है. सभी राजनीतिक दलों को इस पर एक साथ आना चाहिए क्योंकि उनके समर्थन के बिना संशोधन संभव नहीं होगा.’’
1952 से 1967 तक हो चुका है ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’
रावत ने याद दिलाया कि जब निर्वाचन आयोग से एक साथ चुनाव के बारे में पूछा गया था, तो उसने सरकार को सूचित किया था कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ वर्ष 1952, 1957, 1962, 1967 में हुआ था. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा हुआ था और इसे दोबारा करना संभव है. दूसरी बात, निर्वाचन आयोग ने बताया था कि इसे फिर से करने के लिए संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में कुछ संशोधन करने की आवश्यकता है.’’
ईवीएम के लिए धन और सुरक्षा बलों की तैनाती
रावत ने कहा, ‘‘इसके अलावा, ईवीएम के लिए अधिक धन आवंटित करने और चुनाव के दौरान अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाने की जरूरत है. अगर ये चीजें होती हैं तो ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ कराना संभव होगा.’’
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Tags: Loksabha Elections, New Delhi news, One Nation One Election
FIRST PUBLISHED : September 01, 2023, 21:28 IST
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