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‘ऑपेरशन सिंदूर’ में इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान के कुल 6 फाइटर जेट्स, दो हाई-वैल्यू एयरक्राफ्ट, एक C-130 ट्रांसपोर्ट प्लेन और कई क्रूज़ मिसाइलों के साथ-साथ 10 से अधिक अनमैंड कॉम्बैट एरियल वेहिकल (UCAVs) को भी नष्ट कर दिया. पर सवाल यह है कि ये UCAVs आखिर हैं क्या? इनका काम क्या था? और भारत के लिए यह कितना बड़ा खतरा थे? यानी जो 10 पाकिस्तानी UCAVs हवा में ध्वस्त किए गए, वो सिर्फ धातु के टुकड़े नहीं थे, बल्कि भारत की सीमाओं को घेरने की एक नई साजिश का हिस्सा थे, जो वक्त रहते नाकाम कर दी गई.
भारतीय एयरफोर्स की बड़ी कामयाबी
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय वायुसेना ने सीमित समय में पाकिस्तान को भारी सैन्य नुकसान पहुंचाया. UCAVs को मार गिराना इसलिए भी अहम था क्योंकि ये विमान सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों और अस्थायी सैन्य ठिकानों के लिए बड़ा खतरा बन सकते थे. भारतीय रडार यूनिट्स और एयर डिफेंस सिस्टम्स ने इन ड्रोन की गतिविधियों को समय रहते ट्रैक किया और हवा में ही उन्हें खत्म कर दिया. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन UCAVs के जरिए पाकिस्तानी सेना भारत की अग्रिम चौकियों के लाइव विजुअल्स और सिग्नल इंटरसेप्शन की कोशिश कर रही थी.
ये कई घंटे हवा में उड़ सकते थे, यानी लंबे समय तक निगरानी और हमला कर सकते थे.
स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस, इनमें ऐसी तकनीक थी जिससे इनका पता लगाना मुश्किल होता.
इनके जरिए फॉरवर्ड पोस्ट पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी क्षमता पाकिस्तान के पास आ रही थी.
इनमें कुछ UCAVs चीन में बने ‘Wing Loong’ या ‘CH-4’ जैसे हो सकते हैं, जिनका इस्तेमाल पश्चिमी एशिया में भी हुआ है.
भारत के लिए क्या संदेश?
इन UCAVs को मार गिराना न सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक सफलता थी, बल्कि यह भारत की वायु सुरक्षा की तैयारी का सबूत भी है. यह दिखाता है कि भारत न केवल पारंपरिक युद्ध में बल्कि हाइब्रिड और ड्रोन वॉरफेयर में भी तैयार है. पाकिस्तान की कोशिश थी कि इन UCAVs से भारत की सीमा पर चौकियों, हथियार डिपो या संचार केंद्रों को टारगेट किया जाए. लेकिन भारतीय वायुसेना ने चौकसी और सटीक हमलों से पाकिस्तान की यह योजना विफल कर दी. UCAVs आज के युद्ध का नया चेहरा हैं. ये सस्ते, सटीक और रिस्क-फ्री (पायलट के बिना) हथियार बन चुके हैं. पाकिस्तान जैसे देश, जिनकी परंपरागत वायुसेना भारत के मुकाबले कमजोर है, अब इस तरह के ड्रोन वॉरफेयर से बढ़त लेने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दिखा दिया है कि भारत अब किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं है.
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