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सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर के बयान पर यादव महासभा आक्रोशित है। यादव महासभा की ओर से राजभर के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा गया है कि अपनी क्षुद्र स्तरहीन राजनीति सोच के कारण राजभर ने यदुवंशियों पर अमर्यादित टिप्पणी की है। ओपी राजभर को यादव समाज से सार्वजनिक माफी मांगें। अगर वह माफी नहीं मांगते हैं तो उनका हर जिले में विरोध करने के लिए यादव महासभा सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगी।
अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष अरुण यादव ने कि आज यादव समाज ज्ञान, बुद्धि और विवेक के बल से भारत ही नहीं बल्कि विश्व में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सम्मान प्राप्त कर रहा है। डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर आदि तो यादव जाति के लोग कई दशकों से बनते आ रहे है। अब ये समाज भारत के अंतरिक्ष अभियान में भी हिस्सा ले रहा है। इसके बारे में राजभर को ज्ञान ही नही होगा।
अरुण यादव ने कहा कि जाति की ओछी राजनीति में स्तरहीन बयान देना राजभर का शगल बन गया है। अब इस तरह के बयान यादव समाज के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। अरुण यादव ने महासभा के अध्यक्ष के नाते ओम प्रकाश राजभर को चेतवानी दी कि यादव समाज के बारे में की गई अपनी टिप्पणी पर वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगें वरना महासभा उनके खिलाफ जल्द ही सड़क पर उतरने को बाध्य होगी। इसकी समस्त जिम्मेदारी राजभर की स्वयं होगी।
क्या बोल गए राजभर
सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर ने सोमवार को अखिलेश पर हमला करते हुए पूरे अहीर समाज पर आपत्तिजनक बातें बोल दीं। ओपी राजभर ने कहा कि अहीर की बु्द्धि 12 बजे खुलती है। अखिलेश यादव पहले अपनी बुद्धि खोल लें। पूरे अहीर समाज पर आपत्तिजनक बातें बोलने के बाद राजभर ने कहा कि पूर्वांचल में यह कहावत है।
अखिलेश यादव ने 18 अगस्त को फतेहपुर में बुलडोजर कार्रवाई पर कहा था कि पुलिसवालों को ऑर्डर दिया जा रहा है कि दो मंजिल वाले घर गिराओ। गरीब के घर गिराओ। बुलडोजर को दिमाग नहीं होता। उसकी स्टेयरिंग होती है। उसे बड़ी बड़ी इमारते नहीं दिखाई दे रही हैं। जब समाजवादी लोग सरकार में आएंगे तो बुलडोजर वही होगा, पर वो गरीब के घर पर नहीं चलेगा। बल्कि 8 मंजिला और 10 मंजिला इमारत पर चलेगा।
इसी को लेकर एक निजी चैनल के सवाल पर राजभर ने कहा कि अहीर की बुद्धि 12 बजे खुलती है। राजभऱ ने अखिलेश से कहा कि पहले अपनी बुद्धि खोल लें। अखिलेश पर हमला करते हुए राजभर ने कहा कि ये लोग राजभरों का हिस्सा लूट लिये। चौहान, पाल, प्रजापति का हिस्सा लूट लिया। ये दूसरी की बुद्धि क्या खोलेंगे। पहले अपनी बुद्धि खोल लें।
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