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Cervical Cancer Awareness Month 2024: दुनियाभर में हर साल जनवरी माह को सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह 2024 के रूप में मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह कैंसर पूरी दुनिया में प्रजनन के लिए सक्षम महिलाओं में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। सर्वाइकल कैंसर स्त्री रोग से संबंधित सबसे आम कैंसर में से एक है, जो ह्यूमन पेपिलामावायरस (HPV) के कारण महिलाओं को होता है।
क्या है सर्वाइकल कैंसर?
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, ‘सर्वाइकल कैंसर’ गर्भाशय के निचले हिस्से में स्थित सर्विक्स के ऊपर मौजूद कोशिकाओं में होता है। सर्विक्स गर्भाशय (उपरी हिस्सा जहां पर भ्रूण बढ़ता है) को योनी मार्ग (बर्थ कैनाल) से जोड़ता है। यह कैंसर तब होता है जब शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती हैं। एक अध्ययन के मुताबिक दुनिया भर में साल 2020 में करीब 6,04,000 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हुईं, जिनमें से लगभग 3,42,000 की इस बीमारी से मौत हो गई।
सीके बिड़ला हॉस्पिटल (दिल्ली) की ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डॉ. शीतल सचदेवा कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर आम तौर पर 35 वर्ष से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में होता है, लेकिन हाल के वर्षों में इस बीमारी को लेकर एक चिंताजनक आंकड़े देखने को मिले हैं। इन आंकडो़ं के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में कम उम्र और खासतौर पर 25 से 35 वर्ष की महिलाओं में इसके मामले बढ़े हैं। हालांकि, इस उम्र की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले बाकी आयु समूहों के मुकाबले कम हैं, लेकिन बढ़ते मामलों की संख्या पर ध्यान देने और उन्हें लेकर उचित कार्रवाई करने की जरूरत है।
महिलाओं में कम उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं मामले-
सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं जैसे-
पैप स्मीयर की जांच में कमी- कैंसर से पहले होने वाले बदलावों का पता लगाने में पैप स्मीयर की भूमिका बेहद अहम है, बावजूद इसके कम उम्र की महिलाओं के बीच यह जांच कराने वालों की संख्या काफी कम है। इसकी मुख्य वजहें जागरूकता की कमी, परेशानी का डर और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसी लॉजिस्टिक संबंधी चुनौतियां हैं।
एचपीवी का बढ़ता खतरा- ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है और यह असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से फैलने वाला बहुत ही सामान्य प्रकार का संक्रमण है। कम उम्र में यौन संबंध बनाने और कई लोगों से संबंध बनाने से अधिक जोखिम वाले एचपीवी स्ट्रेन का खतरा बढ़ सकता है।
जोखिम के अन्य कारण- एचआईवी या धूम्रपान जैसी चीज़ों की वजह से प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है और इस वजह से एचपीवी संक्रमण तेजी से कैंसर का रूप ले लेता है।
सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले कारण-सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई तरह के कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।
बीमारी का पता लगने में देरी: युवा महिलाएं असामान्य ब्लीडिंग जैसे लक्षणों का या तो अनुभव ही नहीं कर पाती या वे उन्हें अनदेखा कर देती हैं जिसकी वजह से बीमारी का पता चलने में देरी हो जाती है या रोग का उपचार ठीक से नहीं हो पाता है।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव: कम उम्र में कैंसर हो जाने का असर बहुत ही घातक हो सकता है जिसका प्रभाव आत्मविश्वास, आपसी संबंधों और भविष्य की योजनाओं पर पड़ सकता है।
उपचार के बारे में विचार: अग्रिम चरणों में पहुंच चुकी बीमारी में कोन बायोप्सी जैसे फर्टिलिटी स्पारिंग उपचार काम के नहीं रहते हैं और इनका असर मां बनने की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है।
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए जरूरी कदम-
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए कई जरूरी कदम उठाने की जरूरत है।
बेहतर शिक्षा और जागरूकता- एचपीवी,सर्वाइकल कैंसर और नियमित जांच (21 वर्ष की उम्र से)के महत्व के बारे में जानकारी देकर महिलाओं को सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है।
जांच कार्यक्रमों को लोगों की पहुंच तक लाना-स्वास्थ्यसेवा की बाधाओं को खत्म करके जांच के उचित विकल्पों की पेशकश करके युवा महिलाओं को जांच कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
टीकाकरण का विस्तार- पुरुषों और महिलाओं में एचपीवी टीकाकरण की दर से एचपीवी संबंधित कैंसर से लंबे समय तक सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।
सटीक प्रयास- विभिन्न समुदायों में खास तरह के जोखिमों के कारणों का पता लगाने और उनका समाधान करने से इस बढ़ती समस्या की रोकथाम की जा सकती है।
सर्वाइकल कैंसर से बचे रहने के लिए डॉक्टर की सलाह- डॉक्टर कहती हैं कि कम उम्र की महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। इसके लिए समय पर जांच और एचपीवी टीकाकरण से संबंधित समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े जांच कार्यक्रमों और शैक्षणिक प्रयासों को प्राथमिकता देते हुए लोगों के लिए उपलब्ध करवाना चाहिए। लोगों को जोखिम के कारणों को समझकर, टीकाकरण कराकर और नियमित जांच में हिस्सा लेकर अपनी सेहत का खयाल खुद रखना चाहिए। यह सिर्फ चिकित्सा या स्वास्थ्य से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परेशानी भी है। ऐसे में जागरूकता और बचाव के साथ समय से बीमारी का पता लगाकर लोग इस बाधा समस्या को खुद से दूर कर सकते हैं।
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