Home National कर्नाटक में जमीन से निकला 13वीं शताब्दी की रहस्यमयी पत्थर, देश की सदियों पुरानी प्रथा से उठा पर्दा

कर्नाटक में जमीन से निकला 13वीं शताब्दी की रहस्यमयी पत्थर, देश की सदियों पुरानी प्रथा से उठा पर्दा

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कर्नाटक में जमीन से निकला 13वीं शताब्दी की रहस्यमयी पत्थर, देश की सदियों पुरानी प्रथा से उठा पर्दा

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कर्नाटक. मैसूर में क्लासिकल कन्नड़ अध्ययन केंद्र (सीईएससीके) की एक टीम ने होयसला काल के अपनी तरह के पहले अद्वितीय ‘herostone’ पत्थर के शिलालेख की खोज की है. डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने 13वीं शताब्दी के ‘हीरोस्टोन’ (वीरगल्लू) का पता लगाया हैं. इसमें नक्काशी और शिलालेख शामिल हैं, जो होयसल शासक वीरबल्लाल द्वितीय (1172 से 1220 ईस्वी) की अवधि से संबंधित है. इनका साम्राज्य दक्षिण भारत में फैला हुआ था.

यह मांड्या जिले के पांडवपुरा तालुक के चाकाशेट्टीहल्ली में शंबुलिंगेश्वर मंदिर (विजयनगर काल के) में पाया गया था. सेवानिवृत्त प्रोफेसर एनएस रंगराजू का कहना है कि यह हीरोस्टोन अद्वितीय है क्योंकि इसमें ‘सती’ प्रथा का एक दुर्लभ दृश्य दिखाया गया है, जो उस समय प्रचलित था.

जानें क्यों खात हैं herostone

सेवानिवृत्त प्रोफेसर एनएस रंगराजू का कहना है कि आमतौर पर हीरोस्टोन उन नायकों की याद में बनाए जाते हैं, जो युद्ध में लड़े और मारे गए थे. लेकिन इस हीरोस्टोन को ‘मसानय्या’ और वैश्य कबीले (व्यापारी) से चकाशेट्टीहल्ली के निवासी की याद में खड़ा किया गया है. ये हीरो स्टोन होयसलस के वीरबल्लाला द्वितीय के समय का कहा जा रहा है. इस स्टोन में 3 स्तरों में मूर्तिकला पैनल हैं. मध्य में शिलालेख ग्रंथों वाले दो पैनल हैं. हीरो स्टोन के अध्ययन के बाद पाया गया कि दासरा शेट्टीहल्ली (वर्तमान दिन चकाशेट्टीहल्ली) होयसला काल के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र था.

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मसनय्या एक स्थानिका थी, जो होयसला प्रशासन में एक महत्वपूर्ण पद था. वो युद्ध में लड़ी और गंभीर रूप से घायल हो गई थी. अपने पति के प्यार में मसनय्या की पत्नी भी मरना चाहती थी. मसनय्या ने उसे चाकू मार दिया और अपनी जान भी ले ली. माना जा रहा है कि इन दोनों के बलिदान को याद करने के लिए हीरो स्टोन बनाया गया था. प्रोफेसर रंगराजू का कहना है कि आमतौर पर हीरोस्टोन उन नायकों की याद में बनाए जाते हैं जो लड़े और मारे गए थे. प्रोफेसर रंगराजू का कहना है कि इस प्रकार के स्मारक शिलालेख होयसल काल या किसी अन्य राजवंश में नहीं मिले हैं. हीरो और महासती पत्थर कई गांवों में पाए जाते हैं.

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