Home National कोर्ट के फैसले के बाद ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ पर सुरक्षा बढ़ी, आधी रात डीएम संग पहुंचे पुलिस कमिश्नर, बैठक शुरू

कोर्ट के फैसले के बाद ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ पर सुरक्षा बढ़ी, आधी रात डीएम संग पहुंचे पुलिस कमिश्नर, बैठक शुरू

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कोर्ट के फैसले के बाद ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ पर सुरक्षा बढ़ी, आधी रात डीएम संग पहुंचे पुलिस कमिश्नर, बैठक शुरू

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ज्ञानवापी पर वाराणसी जिला जज की अदाल के फैसले के बाद बुधवार की शाम काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के पास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। देर रात वाराणसी के पुलिस कमिश्नर भी मंदिर पहुंच गए और डीएम के साथ ही अन्य पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के साथ मंदिर सभागार में ही बैठक शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अदालत से पूजा की इजाजत को लेकर मिली एक हफ्ते की डेड लाइन और उसे लेकर व्यवस्थाओं पर मंथन किया जा रहा है। बुधवार को जिला जज की अदालत ने ज्ञानवापी से जुड़े एक मामले में यहां के दक्षिणी हिस्से में स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजा-पाठ की इजाजत दे दी है। इस तहखाने में तीस साल से पूजा पाठ नहीं हो रही थी। अदालत ने वाराणसी के डीएम को पूजा-पाठ के लिए एक हफ्ते में प्रबंध करने का भी निर्देश दिया है। पूजा के लिए ज्ञानवापी के चारों तरफ लगी लोहे की बाड़ में से रास्ता भी बनाने का निर्देश अदालत ने दिया है।

अदालत के फैसले के बाद जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया। ज्ञानवापी परिसर के आसपास और विश्वनाथ धाम के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई। मिश्रित आबादी और संवेदनशील इलाकों में भी पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। विश्वनाथ धाम क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के साथ पुलिस ने चौक, नई सड़क, दालमंडी, मदनपुरा, रामापुरा में गश्त किया। भेलूपुर पुलिस ने सोनारपुरा, शिवाला, बजरडीहा में फुट पेट्रोलिंग की। अफसरों ने शहर और देहात क्षेत्र के मिश्रित आबादी वाले इलाकों की विशेष निगरानी का अफसरों ने निर्देश दिया है। साथ ही, सोशल मीडिया पर निगरानी रखने को कहा है।

क्या है अदालत का फैसला

वाराणसी के जिला जज डॉ. अजयकृष्ण विश्वेश की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यासजी के तहखाना (दक्षिणी तहखाना) में पूजन, राग-भोग शुरू करने का आदेश दिया है। उन्होंने तहखाना के रिसीवर के रूप में डीएम को आदेशित किया है कि सात दिनों के अंदर पूजा आदि के लिए अनुकूल व्यवस्था करें। जिला जज कोर्ट ने यह फैसला पं. सोमनाथ व्यास के नाती शैलेन्द्र पाठक व्यास की ओर से दायर वाद पर दिया है। प्रतिवादी व वादी पक्ष की सुनवाई के बाद जिला जज ने 30 जनवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था। 

जिला जज ने अपने आदेश में कहा है कि रिसीवर के रूप में डीएम सात दिनों के अंदर तहखाना के रास्ते से लोहे की बाड़ हटवाएं। पूजा के लिए एक पुजारी को नामित करें। वह पुजारी वादी व्यास परिवार व काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से नियुक्त होगा। 

वादी ने की थीं दो मांगें

उल्लेखनीय है कि ज्ञानवापी परिसर स्थित दक्षिणी तहखाने को व्यासजी का तहखाना कहा जाता है। वहां अंग्रेजी शासन काल से पं. सोमनाथ व्यास (अब स्वर्गीय) व उनका परिवार पूजन व राग भोग करता आ रहा था। सन-1993 में पूजन पर रोक लगाते हुए तहखाना को बंद कर दिया गया। वहां जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर दी गई।

तहखाना अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को सौंप दिया गया। पं. सोमनाथ के नाती शैलेन्द्र पाठक ने गत वर्ष 25 सितंबर को वाद दायर किया। उन्होंने कोर्ट से दो मांग की थी। पहली, तहखाना डीएम की सुपुर्दगी में सौंपा जाए, और दूसरा-वहां फिर से पूजन व रागभोग की अनुमति दी जाए। जिला जज ने गत 17 जनवरी के निर्णय में डीएम को रिसीवर नियुक्त करते हुए तहखाना उनकी सुपुर्दगी में देने का आदेश दिया। 24 जनवरी को डीएम ने तहखाने को अपने कब्ज में ले लिया। वादी शैलेन्द्र पाठक की दूसरी मांग पर बुधवार को निर्णय आया है। 

मुस्लिम पक्ष से अंजुमन ने की थी आपत्ति

गत 30 जनवरी, मंगलवार को सुनवाई के दौरान प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने आपत्ति जताई। उन्होंने दलील दी थी कि 17 जनवरी के आदेश में अदालत ने डीएम को केवल रिसीवर नियुक्त करने का जिक्र किया है। उसमें पूजा के अधिकार का कोई जिक्र नहीं है। इसलिए वाद को निस्तारित मानते हुए खारिज किया जाए।

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