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World Blood Donor Day 2025: हर साल 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाया जाता है. सभी लोगों को ब्लड डोनेशन के बारे में जागरूक करने के लिए यह खास दिन मनाया जाता है. रक्तदान को महादान माना गया है और हर साल लाखों लोगों की जिंदगी ब्लड डोनेशन से बचाई जाती है. स्वस्थ लोग हर 2-3 महीने में ब्लड डोनेट कर सकते हैं, जबकि गंभीर बीमारियों के मरीजों को रक्तदान करने की सलाह नहीं दी जाती है. डॉक्टर से जानेंगे कि कौन ब्लड डोनेट कर सकता है और किसे नहीं करना चाहिए.

ब्लड डोनेशन यानी रक्तदान के जरिए करोड़ों लोगों की जान बचाई जाती है. ब्लड डोनेशन जरूरतमंद मरीजों की जान बचाने का एक महान काम है. हर साल लाखों लोग दुर्घटनाओं, सर्जरी, एनीमिया, कैंसर और अन्य बीमारियों के कारण खून की कमी से जूझते हैं. ऐसे में हेल्दी लोगों द्वारा डोनेट किया गया ब्लड इन लोगों की जिंदगी को बचाता है.

रक्तदान को महादान माना गया है. डॉक्टर्स भी मानते हैं कि हेल्दी लोगों को समय-समय पर ब्लड डोनेट करना चाहिए. इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है, बल्कि फायदे मिलते हैं. ब्लड डोनेशन से शरीर में ब्लड फ्लो ठीक रहता है. 18 साल से ऊपर के हेल्दी लोग रक्तदान कर सकते हैं. हालांकि बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इससे बचना चाहिए.

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कि कोई भी स्वस्थ व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 से 65 साल के बीच हो और वजन कम से कम 50 किलोग्राम हो, वह ब्लड डोनेशन कर सकता है. ब्लड डोनेट करने वाले पुरुषों का हीमोग्लोबिन लेवल 13.0 ग्राम/डेसीलीटर और महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर 12.5 ग्राम/डेसीलीटर से अधिक होना चाहिए.

रक्तदान करने वाले व्यक्ति को किसी गंभीर बीमारी की हिस्ट्री नहीं होनी चाहिए. ब्लड डोनेट करने के पिछले 24 घंटों में कोई भारी दवा या एल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा ब्लड डोनेशन से पहले मेंटली प्रिपेयर होना भी जरूरी होता है. अगर आप पूरी तैयारी के साथ रक्तदान करेंगे, तो इससे आपको किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आएगी. हेल्दी व्यक्ति हर 2-3 महीने में एक बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं.

डॉक्टर ने बताया कि कुछ कंडीशन में ब्लड डोनेशन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. HIV, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइस C या अन्य वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से जूझ रहे लोगों को ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए. जिन लोगों को हाल में मलेरिया या टाइफाइड हुआ है या जो किसी भी गंभीर संक्रमण से ग्रस्त हैं, उन्हें ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी रक्तदान न करें.

अगर कोई व्यक्ति ऐसी दवाएं ले रहा है, जो ब्लड में असर करती हैं, तो उस कंडीशन में ब्लड डोनेट करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. एंटी-कैंसर दवाएं, एंटीबायोटिक्स या स्टेरॉइड्स लेने वाले लोग ब्लड डोनेशन में विशेष सावधानी बरतें और एक्सपर्ट से डिस्कस करें. अगर सही क्वालिटी का खून मरीज पर नहीं चढ़ेगा, तो इससे कंडीशन बिगड़ सकती है.

ब्लड डोनेशन से पहले पर्याप्त नींद लेना, हल्का भोजन करना और धूम्रपान या शराब से बचना जरूरी होता है. ब्लड डोनेशन के बाद आराम करना, खूब पानी पीना और कुछ समय तक भारी शारीरिक मेहनत से बचना चाहिए. ब्लड डोनेशन के तुरंत बाद चक्कर आना, थकान महसूस होना आम बात है, लेकिन यह कुछ ही देर में सामान्य हो जाता है.

डॉक्टर के अनुसार एक स्वस्थ पुरुष हर 2-3 महीने में एक बार ब्लड डोनेट कर सकता है. महिलाएं हर 3-4 महीने में ब्लड डोनेट कर सकती हैं. इससे शरीर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता है, बल्कि इससे नई रक्त कोशिकाएं बनने में मदद मिलती है. कुछ लोग तो इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानते हैं, क्योंकि इससे आयरन का संतुलन बना रहता है.

ब्लड डोनेशन एक अच्छा काम है, लेकिन रक्तदान से पहले यह जानना जरूरी है कि आप इसके लिए एलिजिबल हैं या नहीं. इसलिए हमेशा ब्लड डोनेट करने से पहले डॉक्टर से चेकअप कराना और उनकी सलाह लेना बेहद जरूरी है. सही जानकारी और सावधानी के साथ किया गया ब्लड डोनेशन न केवल दूसरों की जान बचा सकता है, बल्कि यह आपके लिए भी एक अच्छा अनुभव हो सकता है.
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