Home Life Style क्या है गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र? अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र हो गया था फेल, उत्तरा के गर्भस्थ शिशु पर नहीं आई कोई आंच

क्या है गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र? अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र हो गया था फेल, उत्तरा के गर्भस्थ शिशु पर नहीं आई कोई आंच

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क्या है गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र? अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र हो गया था फेल, उत्तरा के गर्भस्थ शिशु पर नहीं आई कोई आंच

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हाइलाइट्स

अश्वत्थामा ने पांडव वंश के समूल नाश के लिए उत्तरा के गर्भ पर अमोघ ब्रह्मास्त्र चलाया था.
भगवान कृष्ण ने माया के कवच से उत्तरा के गर्भ को ढक दिया.

गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र का उपयोग गर्भपात को रोकने के लिए किया जाता है. यह एक ज्योतिष उपाय माना जाता है. श्रीमद्भागवत में व्यास जी ने श्रीवासुदेव के द्वारा उत्तरा की गर्भ रक्षा के बारे में बताया है, जिसे मंत्र और सूत्र रूप में बनाकर उपयोग करते हैं और गर्भवती महिला उस गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र का उपयोग करके लाभ प्राप्त कर सकती है. गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र को बच्चे के जन्म के बाद सवा माह तक पास रखते हैं और फिर उसे जल में प्रवाहित करते हैं. गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र के निर्माण के पृष्ठभूमि में अश्वत्थामा का अर्जुन की पुत्रवधू और अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु पर ब्रह्मास्त्र से किए गए हमले की घटना है.

उत्तरा के गर्भ पर अश्वत्थामा ने चलाया ब्रह्मास्त्र
यह बात उस समय की है, जब महाभारत के युद्ध में दुर्योधन के सभी भाई मारे जा चुके थे और वह भी मौत की अंतिम सांसें ले रहा था. उस समय गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा पांडवों से बदले की आग में जल रहा था. उस दौरान अर्जुन की पुत्रवधू उत्तरा गर्भवती थी. अश्वत्थामा ने पांडवों के वंश का समूल नाश करने के लिए उत्तरा के गर्भ पर अमोघ ब्रह्मास्त्र चला दिया. अश्वत्थामा को भी उस ब्रह्मास्त्र का काट पता नहीं था.

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मच गया हाहाकार, भगवान कृष्ण बने रक्षक
बताया जाता है कि अश्वत्थामा के इस कुकृत्य से हाहाकार मच गया. ब्रह्मास्त्र के हमले से पूरी प्रकृति ही कांप उठी. उधर भगवान श्रीकृष्ण अपने रथ पर सवार होकर पांडवों से विदा ले रहे थे, तभी उनके कानों में उत्तरा की आवाज सुनाई दी. उन्होंने तुंरत ही अपनी माया के कवच से उत्तरा के गर्भ को ढक दिया. भगवान वासुदेव उत्तरा के गर्भ के रक्षक बन गए और ब्रह्मास्त्र का प्रहार निष्फल हो गया.

क्या है गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र?
भगवान ​श्रीकृष्ण उत्तरा के गर्भ के रक्षक थे. श्रीमद्भागवत में व्यास जी ने लिखा है—
अंत:स्थ: सर्वभूतानामात्मा योगेश्वरो हरि:।
स्वमाययावृणोद् गर्भ वैराट्या: कुरुतन्तवे।।

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इसका अर्थ है कि सभी प्राणियों के ह्दय में आत्मा रूप से स्थित योगेश्वर श्री​हरि ने कुरुवंश की वृद्धि के लिए उत्तरा के गर्भ को अपनी माया कवच से ढक दिया. इसे मंत्र के रूप में बनाकर जाप करते हैं.

गर्भरक्षक श्रीवासुदेव मंत्र
ओम अंत:स्थ: सर्वभूतानामात्मा योगेश्वरो हरि: स्वमाययावृणोद् गर्भ वैराट्या: कुरुतन्तवे स्वाहा.

गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र को कच्चे धागे से बनाया जाता है. उसे इस मंत्र से अभिमंत्रित करते हैं और उसके बाद गर्भवती महिला को धारण करने के लिए दिया जाता है. इससे गर्भ की रक्षा होती है, ऐसी धार्मिक मान्यता है.

अगले लेख में गर्भरक्षक श्रीवासुदेव सूत्र के बनाने की विधि और उसके धारण करने की विधि बताई जाएगी.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Tags: Astrology, Dharma Aastha

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