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जैनमुनि आचार्य विद्यासागर महाराज ने सल्लेखना के जरिए शरीर का त्याग कर दिया है। इस अभ्यास को लेकर एक बार राजस्थान हाई कोर्ट ने फैसला भी सुनाया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था।
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