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हाइलाइट्स
जापान में 2011 में आई सुनामी के कारण फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान हुआ था.
जापान संयंत्र को बंद करने के लिए इसका पानी प्रशांत महासागर में फेंकने चाहता है.
लेकिन प्रशांत महासागर से जुड़े कई देशों को इससे नुकासन की आशंका है.
जापान में एक परमाणा संयंत्र पिछले 12 साल से बंद है और उसका खराब बचा हुआ पानी फेंकने की जरूरत है. जापान ने इस पानी को प्रशांत महासागर में फेंकने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से अनुमति भी हासिल कर ली है. उन्हें इस प्रस्ताव को लेकर सुरक्षा संबंधी आशंकाएं हैं. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एंजेसी का कहना है कि इसका लोगों और पर्यावरण पर नहीं के बराबर ही रेडियोधर्मी प्रभाव करेगा. लेकिन जापान के इस प्रस्ताव की मंजूरी के बाद भी इसका विरोध हो रहा है जिसमें चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देश सहित कई पर्यावरण समर्थक भी विरोध कर रहे हैं. लेकिन क्या ये आशंकाएं कमजोर हैं या ऊर्जा एजेंसी का बयान गलत है यह एक सवाल है
हाल ही में मिली है अनुमति
जापान को अंतरारष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से यह अनुमति इसी महीने मिली है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एंजेसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहना है कि एजेंसी की निर्धारित स्थल पर लगातार उपस्थिति रही है और आगे भी रहेगी. इतना ही नहीं एजेंसी लगातार इस योजना की समीक्षा और आंकलन भी करती रहेगी.
एक भूकंप और सुनामी
उन्होंने योजना की अंतिम रिपोर्ट जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशीदा को देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से विस्तृत निष्पक्ष, उद्देश्यात्मक, वैज्ञानिक तौर से मजबूत आंकलन है. लेकिन इस अनुमादोन और जापान के प्रस्ताव को चीन, दक्षिण कोरिया और अन्य प्रशांत द्विपीय देश विरोध कर रहे हैं. 2011 में 9.0 मात्रा का भूकंप आने से पैदा हुई सुनामी के कारण फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र के तीन रिएक्टर पर असर हुआ था.
कौन सा पानी है ये
इस सुनामी से संयंत्र की बिजली और कूलिंग सिस्टम को नुकसान हुआ था. लेकिन यह रूस के चर्नोबिल परमाणु संयत्र दुर्घटना के बाद से दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हादसा बन गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक बहुत सारा पानी नष्ट हुए तीन रिएक्टर के कूलिंग सिस्टम से निकला है तो वहीं बाकी बारिश और जमीने नीचे का पानी संक्रमित स्थल तक पहुंचने वाला पानी है.
पानी बहाना क्यों है जरूरी
परमाणु संयत्र हर दिन 100 क्यूबिक मीटर का अपशिष्ट जल निकालता है. अभी स्थल पर करीब एक हजार टैंकों में 13 लाख क्यूबिक मीटर का पानी जमा हो चुका है और उनकी क्षमता 2024 तक खत्म हो जाएगी. ऐसे में इससे पहले पानी की मात्रा बढ़े और संयंत्र के हालात बेकाबू जापान को ये पानी कहीं ना कहीं छोड़ना पड़ेगा जिससे कि परमाणु संयंत्र बंद किया जा सके.
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Tags: Environment, Japan, Research, Science, World
FIRST PUBLISHED : July 06, 2023, 13:11 IST
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