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चीन को हमेशा सताता रहता है मलक्का का डर
भारतीय नौसेना अंडमान निकोबार द्वीप समूह में तीनों ही सेनाओं की कमान बना रही है। भारत और अमेरिका के नौसैनिक अक्सर हिंद महासागर में मालाबार युद्धाभ्यास करते रहते हैं। इसी वजह से चीन को यह डर सताता रहता है कि भारत और अमेरिका दोनों ही मलक्का स्ट्रेट में उसे घेर सकते हैं। यही वजह है कि चीन अपनी निर्भरता को खत्म करने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर रोड और रेल परियोजना बना रहा है। इससे उसकी अरब सागर तक सीधे पहुंच हो जाएगी। यही नहीं चीन आसानी से खाड़ी देशों, अफ्रीका और यूरोप तक सामान भेज सकता है।
चीन की योजना पाकिस्तान और ईरान के रास्ते यूरोप तक रेल मार्ग बनाने की है। चीन अफगानिस्तान तक अपनी सीपीईसी परियोजना को ले जाना चाहता है। चीन ने साल 2017 में अफ्रीका के जिबूती में अपना पहला विदेशी नौसैनिक अड्डा बनाया था। विश्लेषकों का कहना है कि इसके बाद से ही भारत समुद्र में चीन की चाल से सतर्क हो गया है। चीन के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी सेना से कहा कि सैन्य सहयोग दोनों देशों के बीच रिश्तों में बेहद अहम है। चीन पाकिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह बना रहा है और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के मुताबिक यह ड्रैगन का दूसरा विदेशी नेवल बेस है। चीन के इस कदम से भारत की टेंशन बढ़ गई है जो जमीन पर भी भारत के लिए बड़ा संकट बन गया है।
चीन की मदद कर रहे पाकिस्तानी सैनिक
पाकिस्तान के विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के कई विशेषज्ञ इस समय चीनी सेना में सेवा दे रहे हैं और वे भारत के खिलाफ रणनीति तैयार करने में चीन की मदद कर रहे हैं। यही नहीं चीनी सैनिक पीओके में मौजूद हैं और वे पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर साजिशें रच रहे हैं। चीन पीओके में पाकिस्तानी वायुसेना के ठिकानों का भी इस्तेमाल कर रहा है। इस तरह से चीन न केवल जमीन पर बल्कि समुद्र में भारत को घेरने की तैयारी तेज कर चुका है।
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