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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक्सबीबी के मई आखिर तक हर हफ्ते 4 करोड़ और एक महीने बाद 6.5 करोड़ मामले सामने आने की उम्मीद है। करीब छह महीने पहले ही बीजिंग ने अपने जीरो कोविड प्रतिबंधों को खत्म किया है। नागरिकों के कड़े विरोध के बाद प्रतिबंध हटा तो लिए गए लेकिन इससे 1.4 अरब लोगों पर वायरस की चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया। चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने इस महीने की शुरुआत में अपने साप्ताहिक आंकड़ों को अपडेट करना बंद कर दिया। लिहाजा अब चीन में कोविड-19 स्थिति की वास्तविकता का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।
क्या भारत के लिए चिंता की बात?
अगर चीन में कोरोना के मामले बढ़ते हैं तो यह भारत के लिए भी चिंता की बात हो सकती है क्योंकि जब-जब चीन में कोरोना की लहर आती है, भारत में भी कोरोना मामलों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। झोंग के अनुमान से पता चलता है कि चीन में पिछले साल के आखिर और जनवरी में आई पिछली लहर की तुलना में संक्रमण की यह नई लहर ज्यादा म्यूटेड होगी। उस समय एक अलग ओमीक्रोन सबवेरिएंट ने 3.7 करोड़ लोगों को प्रतिदिन संक्रमित किया था। सोशल मीडिया पर आईं तस्वीरों और वीडियो में लाशों और मरीजों से भरे अस्पताल और श्मशान दिखाई दे रहे थे। बड़ी संख्या में लोगों को दवाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था।
XBB से निपटने की सलाह
नए उभरते खतरे से निपटने के लिए चीन नए टीकों के साथ अपने वैक्सीन भंडारण को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है जो प्रमुख रूप से XBB सबवेरिएंट से बचाव करते हैं। देश के ड्रग रेगुलेटर ने पहले ही इस तरह के दो टीकों को शुरुआती मंजूरी दे दी है। अन्य तीन या चार को भी जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार समूह ने हाल ही में सिफारिश की थी कि इस साल के कोविड-19 बूस्टर शॉट्स को XBB वेरिएंट से बचाव के लिए अपडेट किया जाए।
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