Home Life Style छठ पूजा का तीसरा दिन आज, कैसे दें सूर्य को अर्घ्य? जानें सही विधि, मंत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त समय

छठ पूजा का तीसरा दिन आज, कैसे दें सूर्य को अर्घ्य? जानें सही विधि, मंत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त समय

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छठ पूजा का तीसरा दिन आज, कैसे दें सूर्य को अर्घ्य? जानें सही विधि, मंत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त समय

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हाइलाइट्स

आज शाम के समय में व्रती अस्ताचलगामी सूर्य यानि डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे.
आज के दिन वृद्धि योग और द्विपुष्कर योग बने हैं. वृद्धि योग में डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा.
संध्या अर्घ्य का समय: आज, शाम 05:26 बजे से.

आज 19 नवंबर को छठ पूजा का तीसरा दिन है. खरना की पूजा करके प्रसाद ग्रहण करने के बाद से 36 घंटे का निर्जला व्रत है. आज शाम के समय में व्रती अस्ताचलगामी सूर्य यानि डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे, सूर्य देव और छठ मैया की पूजा करेंगे. फिर कल सुबह में उदयगामी यानि उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे और पारण करके व्रत को पूरा करेंगे. आज के दिन वृद्धि योग और द्विपुष्कर योग बने हैं. आज वृद्धि योग में डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि, मंत्र, सूर्योदय-सूर्यास्त समय आदि.

छठ पूजा 2023 तीसरे दिन के शुभ मुहूर्त
तिथि: कार्तिक शुक्ल षष्ठी, 18 नवंबर को सुबह 09:18 बजे से आज सुबह 07:23 बजे तक
वृद्धि योग: आज, प्रात:काल से लेकर रात 11:28 बजे तक
द्विपुष्कर योग: रात 10:48 बजे से कल प्रात: 05:21 बजे तक
नक्षत्र: श्रवण, सुबह से रात 11:48 बजे तक, फिर धनिष्ठा नक्षत्र
सूर्योदय: सुबह 06:46 बजे
सूर्यास्त: शाम 05:26 बजे
राहुकाल: शाम 04:06 बजे से शाम 05:26 बजे तक
भद्रा: कल, सुबह 05:21 बजे से सुबह 06:47 बजे तक

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छठ पूजा 2023 सूर्य अर्घ्य समय
संध्या अर्घ्य का समय: आज, शाम 05:26 बजे से
प्रात: अर्घ्य का समय: कल, सुबह 06:47 बजे से
ये दोनों ही समय देश की राजधानी दिल्ली का है. आपके शहर में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इससे अलग हो सकते हैं.

छठ पूजा 2023: सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि
1. आज शाम के समय में व्रती पूजा सामग्री के साथ नदी, तालाब या अन्य पूजा स्थान पर एकत्र होंगे.

2. फिर वहां सूप में नारियल, मौसमी फल, ठेकुवा और अन्य पूजा सामग्री रख लेते हैं.

3. उसके बाद एक लोटे या ग्लास में पानी भरते हैं. उसमें दूध, लाल चंदन, लाल फूल, कुश आदि डालते हैं.

4. सूर्य देव जब अस्त हो रहे हों और उनका रंग लाल हो तो उस समय उनको अर्घ्य देते हैं. अर्घ्य देने के लिए घुटने भर पानी में खड़े होकर हाथ में पूजन सामग्री से भरा सूप और लोटा लेते हैं.

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5. दोनों हाथ ऊपर करके पूजन सामग्री सूर्य देव को अर्पित करते हैं और सूर्य मंत्र का जाप करते हुए जल से अर्घ्य देते हैं.

6. अर्घ्य देते समय जल की धार को धीमी गति से नीचे गिराते हैं. तीव्र धार से अर्घ्य नहीं देते हैं. अर्घ्य देते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि उस जल के छींटे शरीर पर न पड़ें.

7. अर्घ्य देने के बाद सूर्य देव को नमस्कार करें और अपने स्थान पर 3 बार परिक्रमा करें. पूजा के बाद सूर्य देव और छठ मैया से अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें.

सूर्य मंत्र
ओम सूर्याय नम:
या
ओम ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।

सूर्य अर्घ्य का महत्व
सूर्य देव को अर्घ्य देने से उनकी कृपा प्राप्त होती है. सूर्य देव प्रसन्न होकर धन, धान्य, आरोग्य, सुख, समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. वहीं छठ मैया नि:संतान को संतान सुख, धन, समृद्धि आदि का आशीष देती हैं. सूर्य पूजा करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति भी मजबूत होती है, जिससे आपके यश और कीर्ति में वृद्धि होती है.

Tags: Bihar Chhath Puja, Chhath Mahaparv, Chhath Puja, Dharma Aastha

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