महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को बुधवार शाम करीब 5 बजे मुंबई की आर्थर रोड जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया। मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें जमानत देने के अपने आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अनिल देशमुख नवंबर 2021 से जेल में थे। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। देशमुख ने कहा, “मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है … हाईकोर्ट ने देखा है कि मुझे एक झूठे मामले में फंसाया गया था।” अजीत पवार सहित एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने जेल के बाहर उनका स्वागत किया।
रिहाई की औपचारिकताएं पूरी होने और जमानत राशि भरने के बाद देशमुख को बुधवार शाम को जेल से रिहा कर दिया गया। उनके वकील अनिकेत निकम ने कहा कि सीबीआई ने उन्हें जमानत देने के आदेश को रोकने के लिए कल एक और अर्जी दी थी। निकम ने कहा, “सीबीआई की ओर से कल एक और आवेदन दायर किया गया था, जिसमें स्टे ऑर्डर को और बढ़ाने की मांग की गई थी। आवेदन को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।”
जमानत देते हुए कोर्ट ने कई शर्तें भी लगाई हैं। देशमुख निचली अदालत की पूर्व स्वीकृति के बिना मुंबई को नहीं छोड़ सकते हैं और उन्हें जांच में सहयोग भी करना होगा। अनिल देशमुख को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 दिसंबर को 1 लाख रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत दी थी, लेकिन सीबीआई ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए स्टे ऑर्डर के लिए एक आवेदन दायर किया, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया। 10 दिनों की मोहलत दी गई थी, और बाद में इसे 27 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया था। मंगलवार को याचिका को बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।