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टाटा ग्रुप की ऐपल के साथ साझेदारी होने जा रही है। रिपोर्ट की मानें, तो टाटा समूह की डील फाइनल होने वाली है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक डील को अगस्त 2023 तक मंजूरी मिल सकती है। अगर यह डील हो जाती है, तो ऐपल पहली ऐसी कंपनी होगी, जिसे आईफोन बनाने का डील मिल रही है।
टाटा बनाएगी iPhone 15
टाटा समूह विस्ट्रॉन फैक्ट्री के अधिग्रहण की डील को मंजूरी मिल सकती है, जो कि कर्नाटक के साउथईस्ट में मौजूद है। इसका वैल्यूएशन करीब 600 मिलियन डॉलर का है। बता दें कि इस डील को लेकर करीब एक साल से बातचीत चल रही है। इस फैक्ट्री को आईफोन 14 मॉडल की मैन्युफैक्चरिंग के लिए जाना जाता है। इस फैक्ट्री में करीब 10,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। रिपोर्ट की मानें, तो मार्च 2024 तक विस्ट्रॉन इस फैक्ट्री से करीब 1.8 बिलियन डॉलर के ऐपल फोन बनाएगी। टाटा इस फैक्ट्री में iPhone 15 का निर्माण करेगी।
क्या होगा फायदा?
टाटा ने वादा किया है कि अगर डील फाइनल हो जाती हैं, तो वो अगले साल तक फैक्ट्री की वर्कफोस को तीन गुना करेगा। ऐसे में बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा होगी। साथ ही भारत से स्मार्टफोन के निर्यात में तेजी आएगी। वही आईफोन के निर्माण में लागत कम आएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में आईफोन की कीमत में कमी आ सकती है।
टाटा बनाएगी iPhone 15
टाटा समूह विस्ट्रॉन फैक्ट्री के अधिग्रहण की डील को मंजूरी मिल सकती है, जो कि कर्नाटक के साउथईस्ट में मौजूद है। इसका वैल्यूएशन करीब 600 मिलियन डॉलर का है। बता दें कि इस डील को लेकर करीब एक साल से बातचीत चल रही है। इस फैक्ट्री को आईफोन 14 मॉडल की मैन्युफैक्चरिंग के लिए जाना जाता है। इस फैक्ट्री में करीब 10,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। रिपोर्ट की मानें, तो मार्च 2024 तक विस्ट्रॉन इस फैक्ट्री से करीब 1.8 बिलियन डॉलर के ऐपल फोन बनाएगी। टाटा इस फैक्ट्री में iPhone 15 का निर्माण करेगी।
क्या होगा फायदा?
टाटा ने वादा किया है कि अगर डील फाइनल हो जाती हैं, तो वो अगले साल तक फैक्ट्री की वर्कफोस को तीन गुना करेगा। ऐसे में बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा होगी। साथ ही भारत से स्मार्टफोन के निर्यात में तेजी आएगी। वही आईफोन के निर्माण में लागत कम आएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में आईफोन की कीमत में कमी आ सकती है।
विस्ट्रॉन क्यों बेच रही कंपनी
रिपोर्ट की मानें, तो विस्ट्रॉन को नुकसान हो रहा है। क्योंकि ऐपल के टर्म और कंडीशन के तहत कंपनी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। दरअसल विस्ट्रॉन का कहना है कि ऐपल की तरफ से फॉक्सकॉन और पेगाट्रॉन के मुकाबले ज्यादा मार्जिन लिया जा रहा है। वही चीन के मुकाबले भारत में अलग चुनौतियां है, जिससे भारत में कर्मचारियों के साथ काम करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में विस्ट्रॉन अपनी कंपनी बेचनी जा रही है।
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