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ड्रीमलाइनर क्रैश वीडियों हुआ डीकोड, इंजन फेलियर की आशंका ज्यादा, जानिए एक्सपर्ट ने और क्या कहा?

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ड्रीमलाइनर क्रैश वीडियों हुआ डीकोड, इंजन फेलियर की आशंका ज्यादा, जानिए एक्सपर्ट ने और क्या कहा?

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AIR INDIA CRASH EXPLAINER: MAY DAY या PAN-PAN कॉल ATC से अटेंशन लेने के लिए होती है क्योंकि ATC में एक साथ बहुत सारी कॉल पर व्यस्त होते हैं. जैसे ही कोई पायलट PAN-PAN या MAY DAY MAY DAY कॉल करता है तो सब उसी कॉ…और पढ़ें

ड्रीमलाइनर क्रैश वीडियों हुआ डीकोड, इंजन फेलियर की ओर इशारा

इंजन फेलियर हो सकता है एक कारण- एक्स्पर्ट

हाइलाइट्स

  • एयर इंडिया क्रैश में इंजन फेलियर की आशंका.
  • लैंडिंग गियर बंद ना होने का कारण हाइड्रोलिक प्रेशर की कमी.
  • MAY DAY कॉल के अलावा PAN-PAN कॉल भी दी जाती है.

AIR INDIA CRASH EXPLAINER: अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के दुर्घटनाग्रस्त होने के असली कारणों का पता लगाने के लिए एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) जांच में जुट गया है. अमेरिका से भी एक टीम इस हादसे की जांच की मदद के लिए भारत पहुंची रही है. असल वजह तो जांच के बाद ही साफ होगी, लेकिन विशेषज्ञ वीडियो देखकर ही इस बात की आशंका जता रहे हैं कि इस हादसे के पीछे इंजन फेलियर सबसे बड़ा कारण हो सकता है. एयर फोर्स से रिटायर फाइटर पायलट और वर्तमान में पायलटों की ट्रेनिंग देने वाले विंग कमांडर रोहित काद्यान (रि) ने अपनी राय रखी है. विंग कमांडर रोहित ने कई ऐसे संकेतों की ओर इशारा किया जो उनके विमान उड़ाने के अनुभव से मेल खाते हैं.

1- इंजन फेलियर
इंजन फेलियर दो तरह से हो सकता है. पहला, बर्ड हिट जो कि काफी आम है, दूसरा है कोई तकनीकी खराबी. खुद बतौर फाइटर पायलट उनका एयरक्राफ्ट भी एक बार बर्ड हिट का शिकार हुआ था. पायलट को एक इंजन के सहारे एयरक्राफ्ट को लैंड कराना पड़ा था. बर्ड हिट से इंजन धीरे-धीरे बंद होने लगता है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर एक बर्ड इतने बड़े और भारी प्लेन को कैसे गिरा सकता है. लेकिन यह सच है. चिड़िया के टकराने से इंजन की पहली लेयर के ब्लेड को नुकसान पहुंच सकता है. एक बार ब्लेड टूटने के बाद वह इंजन के अंदर ही रहता है और बाकी हिस्सों को नुकसान पहुंचाना शुरू करता है. इंजन धीरे-धीरे सीज होना शुरू हो जाता है. एक इंजन के फेल होने पर भी एयरक्राफ्ट उड़ सकता है, लेकिन इसे तय किए मानक से ज्यादा तेज इंजन चलाना होता है. रनवे के पास से जो 59 सेकंड का वीडियो है, उसमें साफ दिख रहा है कि रनवे से बाहर जाते ही एयरक्राफ्ट एक तरफ ड्रिफ्ट होता महसूस हो रहा है. ऐसा तब होता है जब एक तरफ का इंजन बंद होने लगता है. जिस तरफ का इंजन बंद हो जाता है, वह उसी तरफ मुड़ने लगता है. दोनों इंजन के बंद होने के बाद तो कोई चांस ही नहीं बचता. अमेरिका के चर्चित हडसन रिवर फोर्स लैंडिंग के दौरान विमान के दोनों इंजन फेल हो गए थे. चूंकि एयरक्राफ्ट काफी ऊंचाई पर था और वह आसानी से ग्लाइड कर सकता था, तो पायलट ने विमान को ग्लाइड कराते हुए हडसन नदी में लैंड कराया था. लेकिन एयर इंडिया के विमान के पास इतनी ऊंचाई नहीं थी कि वह ग्लाइड कर सके. अगर एक इंजन फेल होने लगता है तो उसका तापमान में बदलाव शुरू हो जाता है. ऐसी स्थिति में उस इंजन को या तो बंद कर दिया जाता है या फिर उसकी पावर को कम कर दिया जाता है. विमान में कोई भी दिक्कत आती है तो कॉकपिट में इसका पता चलता रहता है. अगर इंजन में आग लग गई तो फिर उसे बुझाने का एक्शन लेना होता है. अगर दोनों इंजन डैमेज हो रहे हो तो फिर पायलट सिर्फ यही कोशिश कर सकता है कि जब तक इंजन चल रहे हैं, विमान को कहीं न कहीं लैंड करा दिया जाए.

2- लैंडिंग गियर बंद ना होने का कारण
क्रैश वीडियो में साफ दिख रहा है कि एयरक्राफ्ट के लैंडिंग गियर खुले हुए थे. सामान्य तौर पर रनवे से परफेक्ट टेकऑफ के तुरंत बाद ही सिस्टम संदेश दे देता है और फिर लैंडिंग गियर को बंद कर दिया जाता है. इस केस में ऐसा नहीं हुआ. लैंडिंग गियर खुला ही रहा. एक बोइंग 787 के पायलट के मुताबिक अगर यह एयरक्राफ्ट दोनों इंजन खो देता है तो लैंडिंग गियर भी बंद नहीं किया जा सकता. क्योंकि लैंडिंग गियर सिस्टम हाइड्रोलिक प्रेशर पर निर्भर करता है. यह प्रेशर दोनों इंजन की वजह से ही पैदा होता है. और हाइड्रोलिक प्रेशर के ना होने के चलते गियर वापस नहीं आ सकता. ऐसे में क्रू को बैकअप प्लान और प्रोसिजर को एक्टिव करना पड़ता है.

3- इंधन, वजन और तापमान के कारण को नकारा
किसी भी एयरक्राफ्ट को टेकऑफ कराने के लिए सुरक्षा मानकों को सख्ती से फॉलो किया जाता है. इसमें सबसे अहम होता है कि इंजन में इंधन, पैसेंजर लोड और बाहर का तापमान. सभी को तय किए गए मानकों के हिसाब से ही रखा जाता है. जरूरत पड़ने पर या तो इंधन को कम किया जाता है या फिर तापमान को कम होने का इंतजार किया जाता है. एक नहीं बल्कि दो बार इसे चेक किया जाता है. एक बार तो पायलट खुद इसे चेक करते हैं. सब कुछ ठीक रहा तो ही उड़ान की मंजूरी दी जाती है.

4- V-1 पार करने के बाद विमान को रोका नहीं जा सकता है
टेक ऑफ के दौरान पायलट और को-पायलट दोनों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी वाले काम को ही खुद करना होता है. रोहित काद्यान के मुताबिक टेकऑफ शुरू करते वक्त दोनों पायलट एक प्रोसिजर को फॉलो करते हैं. पहले सभी चेक्स किए जाते हैं, अलग-अलग स्पीड पर अलग-अलग चेक्स होते हैं, इससे एयरक्राफ्ट की परफॉर्मेंस पता चलती है. एक डिसीजन स्पीड होती है जिसके बाद विमान को रोका नहीं जा सकता, उसे तय किया जाता है. जिसे V-1 कहा जाता है. इस V-1 स्पीड तक पहुंचने से पहले अगर किसी तरह की गड़बड़ी होती है या बर्ड हिट का मामला सामने आता है तो मिशन को एबोर्ट किया जा सकता है. अगर एक बार यह स्पीड को पार कर लिया गया तो फिर एयरक्राफ्ट को टेकऑफ से रोका नहीं जा सकता. क्योंकि ब्रेक ही नहीं लगेंगे. कोशिश की गई तो या तो लैंडिंग गियर टूट सकता है या फिर ओवर शूट हो सकता है यानी कि रनवे को पार कर वह जमीन पर जा सकता है. V-1 के बाद अलग-अलग स्टेज में अलग-अलग चेक्स जारी रहते हैं। रोहित के मुताबिक एयरक्राफ्ट में गड़बड़ी V-1 क्रॉस करने के बाद ही हुई होगी. तभी पायलट उसे एबॉर्ट नहीं कर सके.

MAY DAY कॉल से पहले भी होती है एक कॉल
जब भी एयरक्राफ्ट में ऐसी गड़बड़ी आ जाए कि वह कंट्रोल से बाहर हो जाए, एक्सट्रीम इमर्जेंसी के दौरान ही पायलट की तरफ से एयर ट्रैफिक कंट्रोल को MAY DAY कॉल दी जाती है. इस कॉल के बाद जितने भी दूसरे एयरक्राफ्ट ATC के संपर्क में होते हैं, वे सब इसी इमर्जेंसी की तरफ फोकस करते हैं. इमर्जेंसी लैंडिंग की तैयारियों के साथ-साथ दिशानिर्देश भी दिए जाते हैं कि क्या करना है. एयरस्ट्रिप की इमर्जेंसी लैंडिंग की तैयारी शुरू कर दी जाती है. रनवे का लैंडिंग पाथ और अप्रोच एरिया को क्लियर रखा जाता है. उसी दौरान अगर किसी और एयरक्राफ्ट की लैंडिंग शेड्यूल होती है तो उसे डायवर्ट कर दिया जाता है. फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस के साथ-साथ सपोर्ट स्टाफ और ग्राउंड स्टाफ को भी अलर्ट कर दिया जाता है. विंग कमांडर रोहित काद्यान के मुताबिक हर कॉकपिट में क्विक रेफरेंस हैंडबुक होती है. इसमें हर तरह की इमरजेंसी में क्या प्रोसीजर फॉलो करना है, वह लिखा होता है. वह रेफरेंस बुक पढ़कर भी और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से बात की जाती है. एक्स्ट्रीम इमरजेंसी होती है तब ही MAY DAY कॉल दी जाती है. अगर इमरजेंसी एक्स्ट्रीम नहीं है तो PAN-PAN कॉल दी जाती है.

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