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दहशरे के साथ त्योहारों का सीजन शुरू हो जाता है। इस फेस्टिवल को लेकर बच्चों में काफी जोश होता है। फेस्टिव सीजन बच्चों में संस्कार डालने और अपनी संस्कृति के बारे में सिखाने का अच्छा मौका है। दशहरा भी ऐसा ही एक त्योहार है जिसके बहाने आप बच्चों के मन में बचपन से ही अच्छे-बुरे की सीख डाल सकते हैं। बच्चे कहानी के हीरो की तरह बनना चाहते हैं। रामायम के उदाहरण देकर उन्हें बचपन से ही राम के गुण अपनाने की सीख दें।
सब पर आ सकता है बुरा वक्त
राम इतने बड़े राजा थे। उनके जीवन में कष्ट आए। बच्चों को समझाएं कि भगवान भी इस धरती पर आते हैं तो उन्हें जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। अगर उनके जीवन में कोई दिक्कत आए तो घबराएं नहीं बल्कि उसका सामना करें।
रखें अच्छे दोस्त और संगति
राम रावण को अकेले न हरा पाते अगर उनके पास वानर सेना न होती। किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमारे पास अच्छे दोस्त या टीम होनी चाहिए। हमेशा अच्छी संगति चुनें। लोगों को सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए साथ न रखें बल्कि जीवनभर के रिश्ते बनाएं।
पैसे-पावर से बड़े रिश्ते
पिता का मान रखने के लिए राम ने राजगद्दी छोड़ दी और 14 साल का वनवास चुना। लक्ष्मण ने भाई होने का फर्ज निभाया और वह भी उनके साथ गए। वहीं भरत ने भी सिंहासन का लालच नहीं किया। वह भाई के सम्मान और प्यार में उस राजगद्दी पर नहीं बैठे बल्कि राम के लौटने का इंतजार किया। इस कहानी से आप बच्चों के मन में बड़ों के प्रति आदर और रिश्तों की अहमियत की सीख बचपन से डाल सकते हैं।
नेगेटिव लोगों से दूर रहें
कैकेयी राम को अपने बेटे से ज्यादा प्यार करती थीं। लेकिन कैकेयी ने उनके कान भरकर घर में कलेश करवाया। बेटे के वियोग में दशरथ की जान गई। सारे बेटे कष्ट में रहे। परिवार की बहू का हरण हो गया। इससे शिक्षा मिलती है कि हमें किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए और नेगेटिव लोगों से दूर रहना चाहिए।
घमंड न करें
रावण विद्वान राजा था। अपने अहंकार के चलते उसने राम और उनकी सेना को छोटा समझने की कोशिश की। यह उसकी मौत का कारण बना। रावण के घमंड ने उसके सारे गुणों पर पानी फेर दिया। इतना विद्वान और शिवभक्त होने के बाद भी रावण की पूजा कोई नहीं करता।
न रखें बदले की भावना
रावण ने अपनी बहन की बेइज्जती का बदला लेने के लिए सीता का हरण किया। इसका खामियाजा उसे और उसके परिवार को उठाना पड़ा। पहले सोने की लंका खाक हुई। राम-रावण के युद्ध में कई जानें गईं। वहीं राम ने खुद को वनवास भेजने वाली कैकेयी को भी माफ कर दिया। बच्चों के सहनशीलता की सीख दें। बताएं कि गुस्सा और बदले की भावना आपको बड़े संकट में डाल सकते हैं।
न करें भेदभाव
भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाए। उनकी सेना में वानर भी थे। राम सबसे स्नेह रखते थे किसी के साथ भेदभाव नहीं रखते थे। बच्चों को सिखाएं कि कोई किसी भी रंग, धर्म,जाति का हो सबसे प्यार और अपनापन रखें।
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न करें जिद
सीता ने राम से सोने का हिरण लाने की जिद की और वह खुद मुसीबत में फंस गईं। बच्चों को समझाएं कि जिद करना ठीक आदत नहीं।
बुराई पर अच्छाई की जीत
बुराई कितनी भी शक्तिशाली या पैसे वाली हो। जीत हमेशा सच और अच्छाई की होती है। रावण के पास सोने की लंका थी, अच्छा दिमाग था, वह शिवजी का बड़ा भक्त था फिर भी उसकी पूजा कोई नहीं करता। आज भी राम पूजे जाते हैं।
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