Home Life Style दुनियाभर में फेमस है भारत का ये चावल, खुशबू बड़ा देती है भूख, लोग मानते है…

दुनियाभर में फेमस है भारत का ये चावल, खुशबू बड़ा देती है भूख, लोग मानते है…

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दुनियाभर में फेमस है भारत का ये चावल, खुशबू बड़ा देती है भूख, लोग मानते है…

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दिलीप चौबे/कैमूर: आपने कई प्रकार के चावल खाए होंगे, लेकिन जिस चावल के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं इस चावल को जिन लोगों ने खाया हैं, उनके मुंह में नाम सुनते ही पानी आ जाता है. खबर पढ़ते-पढ़ते आपके मुंह में भी कहीं पानी ना आ जाए और आपको भी इस चावल को खाने का मन करने लगे. दरअसल, बिहार के कैमूर जिला स्थित भभुआ प्रखंड अंतर्गत मोकरी गांव में तैयार होने वाला गोविंद भोग चावल अपने आप में बेहद खास है. चावल की ये बेहद खास किस्म है और इस चावल की सुगंध आपको मोहित कर देगी. स्थानीय लोग इसे सोनाचूर चावल भी कहते हैं. यह बेहद खास किस्म का चावल है और इसके धान की उपज सिर्फ इसी इलाके में होती है.

ये चावल अगर कहीं बन रहा होता है तो पूरा वातावरण सुगंधित हो जाता है. बेहद खास स्वाद और खुशबू की वजह से ही इसकी मांग काफी रहती है. लोग पूछने पर मजबूर हो जाते हैं और इस चावल को पाने की इच्छा जाहिर करते हैं. किसान देव मुनि पटेल ने बताया कि मोकरी गांव मुंडेश्वरी माता के मंदिर के समीप पहाड़ पर स्थित है. मान्यता है कि हर साल बारिश का पानी पहाड़ से माता के स्थान को स्पर्श करते हुए पहाड़ी जड़ी-बूटियों अपने साथ लेकर गांव के खेतों तक पहुंचता है. उसी पानी से खेत की सिंचाई होती है. इसलिए यहां का अनाज ज्यादा खुशबूदार होता है.

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इस चावल पर मां मुंडेश्वरी की है विशेष कृपा
किसान देव मुनि पटेल ने बताया कि इस खास धान की खेती मोकरी गांव के पश्चिम दिशा स्थित सिगुरा और परसिया सिवान में होती है. इन्हीं खेतों में विश्व प्रसिद्ध धान की उपज होती है. जिससे सोनाचुर और गोविंद भोग चावल तैयार होता है. खेत में जब पहाड़ से पानी आता है तो पहाड़ी जड़ी-बूटियों के साथ आता है. उन्होंने बताया कि सिगुरा और परसिया सिवान इलाके के खेतों में साल में केवल एक ही फसल होती है. यहां रबी फसल की बुआई नहीं होती है. खेत में लगे धान को नीचे से डंठल सहित नहीं काटा जाता है केवल धान की बाली को काट लिया जाता है. यहां के किसान उसी धान से चावल तैयार कर खाते और बिक्री करते हैं. खेत में पड़ा डंठल खेत सड़-गल जाता है और जुताई कर दी जाती है. खेत में पड़ा डंठल खाद का भी काम कर जाता है. इसे प्रकृति का वरदान कह सकते हैं कि इस चावल को बिना खाए इसकी खासियत महसूस नहीं किया जा सकती है. इस चावल की खुशबू और स्वाद दोनों गजब है. इसे यहां के लोग मां मुंडेश्वरी की कृपा मानते हैं.

Tags: Bihar News, Food, Kaimur, Local18

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