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Gorakhpur Mafia: गोरखपुर का माफिया अजीत शाही बड़ी सफाई से दोहरी जिंदगी जी रहा था। उस पर दूसरा केस 12 जून को गीडा थाने में दर्ज हुआ था। पता चला था कि माफिया अजीत शाही अपनी माफियागिरी जिस नाम से करता है उस नाम से सम्पत्ति या अन्य काम नहीं करता। शराफत की जिदंगी के लिए उसने अपना नाम अजीत वीर विक्रम सिंह रखा है।
माफिया की दोहरी जिंदगी उजागर होने के बाद उसके खिलाफ गीडा थाने में पिपरौली चौकी इंचार्ज ने जालसाजी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया है। विवेचना में सामने आया कि पुलिस और प्रशासन को धोखा देने के लिए वह दो नाम का इस्तेमाल करता है। माफिया अजीत शाही का पता था कि उसके अपराध से उसे सजा हो सकती है ऐसे में उसने विदेश भागने तथा अवैध संम्पत्ति को वैध सम्पत्ति में परिवर्तित करने के उद्धेश्य से अजीत वीर विक्रम सिंह का नाम इस्तेमाल करता था। उसने इसी नाम से गलत तरीके से पासपोर्ट भी बनवाया है। पासपोर्ट पर उसने अलग तरीके से हस्ताक्षर किया है।
कोर्ट में दिए गए शपथपत्र में अलग तरीके से हस्ताक्षर किया है। विवेचना में यह भी सामने आया कि दो-दो भारत निर्वाचन कार्ड भी बनवाया है। वह इसका इस्तेमाल अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग आपराधिक उद्धेश्य के लिए करता है। विवेचना में अजीत शाही के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।
50 करोड़ की जमीन माफिया के कब्जे से कराया था मुक्त
माफिया अजीत शाही द्वारा नगर निगम की पिछले कई वर्षों से कब्जा की गई 32 डिसमिल जमीन पर बुलडोजर चला कर कब्जा हटाने के साथ ही जमीन को भी गोरखपुर नगर निगम ने अपने कब्जे में ले चुका है। यह जमीन 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के कीमत की है। इस मामले में के माफिया अजीत शाही के खिलाफ नगर निगम के आर आई ने कैंट थाने मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
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