Home Life Style नवंबर का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी शिव पूजा, जानें मुहूर्त, महत्व

नवंबर का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी शिव पूजा, जानें मुहूर्त, महत्व

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नवंबर का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी शिव पूजा, जानें मुहूर्त, महत्व

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हाइलाइट्स

कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी तिथि 24 नवंबर दिन शुक्रवार को शाम 7 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी.
प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 06 मिनट से शुरू हो रहा है.

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस बार आने वाला प्रदोष नवंबर 2023 का अंतिम प्रदोष व्रत है. उस दिन सर्वार्थ सिद्धि समेत 3 शुभ योग बन रहे हैं. यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए यह शुक्र प्रदोष व्रत है. शुक्र प्रदोष को व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा विधि विधान से करने पर वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, सौभाग्य बढ़ता है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं कि नवंबर का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? शुक्र प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त क्या है? उस दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं.

कब है नवंबर 2023 का अंतिम प्रदोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 24 नवंबर दिन शुक्रवार को शाम 7 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि की समाप्ति 25 नवंबर दिन शनिवार को शाम 5 बजकर 22 मिनट पर होगी. 25 नवंबर को प्रदोष काल में पूजा का मुहूर्त नहीं है, इस वजह से नवंबर का अंतिम प्रदोष व्रत 24 नवंबर को रखा जाएगा.

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प्रदोष व्रत 2023 पूजा मुहूर्त
24 नवंबर को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 06 मिनट से शुरू हो रहा है और यह 08 बजकर 06 मिनट तक है. प्रदोष व्रत पर शिव पूजा के लिए आपको 1 घंटे का शुभ समय प्राप्त होगा.

सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी प्रदोष व्रत की पूजा
नंवबर के अंतिम प्रदोष व्रत के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, सिद्धि योग और व्यतीपात योग बन रहे हैं. इसमें शुरू के तीन योग शुभ फलदायी हैं. शाम को जब आप प्रदोष व्रत की पूजा करेंगे, उस समय सर्वार्थ सिद्धि योग होगा.

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प्रदोष वाले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन बना है, वहीं अमृत सिद्धि योग सुबह 06 बजकर 51 मिनट से शाम 04 बजकर 01 मिनट तक है. सिद्धि योग प्रात:काल से लेकर सुबह 09 बजकर 05 मिनट तक है. उसके बाद से व्यतीपात योग शुरू हो जाएगा, जो पूरी रात तक रहेगा. उस दिन रेवती नक्षत्र सुबह से लेकर शाम 04 बजकर 01 मिनट तक है. उसके बाद से अश्विनी नक्षत्र होगा. प्रदोष व्रत के दिन पंचक सुबह 06 बजकर 51 मिनट से शाम 04 बजकर 01 मिनट तक है.

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व
दिन के अनुसार, प्रदोष व्रत का महत्व भी अलग-अलग होता है. जैसे शनि प्रदोष व्रत पुत्र की प्राप्ति के लिए रखा जाता है. ऐसे ही शुक्र प्रदोष व्रत रखने और शिव पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है. शिव कृपा से वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियों का अंत होता है.

Tags: Dharma Aastha, Lord Shiva

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