Home World न कोई सोनम, न मुस्कान … बदल जाएंगे भविष्य के प्रेमी-प्रेमिका, सिर्फ मिलाएंगे हां में हां!

न कोई सोनम, न मुस्कान … बदल जाएंगे भविष्य के प्रेमी-प्रेमिका, सिर्फ मिलाएंगे हां में हां!

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न कोई सोनम, न मुस्कान … बदल जाएंगे भविष्य के प्रेमी-प्रेमिका, सिर्फ मिलाएंगे हां में हां!

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Robots will replace lovers: सुनने में ये थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन आने वाले वक्त में हालात और जज़्बात दोनों ही बदलने वाले हैं. ये नोंकझोंक और झगड़े-लड़ाई नहीं होंगे बल्कि प्यार भी सुलझा हुआ होगा. वजह क्या है …और पढ़ें

न कोई सोनम, न मुस्कान ... बदल जाएंगे भविष्य के प्रेमी-प्रेमिका!

AI प्रेमियों पर होगा लोगों को भरोसा. (AI Generated)

हाइलाइट्स

  • रोबोट्स भविष्य में प्रेमी-प्रेमिका बन सकते हैं.
  • AI से लैस साथी से डील करना आसान होगा.
  • AI के बढ़ते इस्तेमाल से मानवीय रिश्तों में कमी आएगी.

आप भी प्यार-मोहब्बत और बेवफाई की कहानियां सुनकर ऊब गए होंगे. बेवफाई के किस्से सुनकर तो लोगों का इस पर से विश्वास ही उठा जा रहा है लेकिन ठहरिये, इसका भी इलाज मिलेगा. आने वाली पीढ़ियों को इन सबसे छुटकारा मिल जाएगा क्योंकि उनके प्रेमी-प्रेमिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस होंगे.

सुनने में ये थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन आने वाले वक्त में हालात और जज़्बात दोनों ही बदलने वाले हैं. ये नोंकझोंक और झगड़े-लड़ाई नहीं होंगे बल्कि प्यार भी सुलझा हुआ होगा. वजह क्या है ये चलिए आपको हम बताते हैं. दरअसल एक एक ताजा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि लाखों छात्र मानते हैं कि भविष्य में साइको रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न सिर्फ उनके दोस्तों की जगह ले सकते हैं, बल्कि उनके रोमांटिक पार्टनर भी बन सकते हैं!

इंसान छोड़िए, रोबोट ही सही हैं

ग्लोबल स्टूडेंट हाउसिंग ब्रांड यूगो ने 9 देशों के 7,000 छात्रों के बीच सर्वे किया, जिसमें 27 फीसदी छात्रों ने कहा कि AI मशीनें जल्द ही उनके प्रेमी या प्रेमिका की जगह ले सकती हैं. खासकर ब्रिटेन में 31 फीसदी छात्रों का मानना है कि सच्ची दोस्ती की जगह अब AI साथी ले लेंगे. उन्हें लगता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस साथी से डील करना आसान होगा. उन्हें न तो उन्हें कोई बहस करनी होगी और न ही कोई बात टालेगा. बात यहीं खत्म नहीं होती, 44 फीसदी ब्रिटिश छात्र AI की संभावनाओं से उत्साहित हैं और 43 फीसदी इसका इस्तेमाल अपनी पढ़ाई में कर रहे हैं. बावजूद इसके जेन Z के मन में डर भी है.

खत्म न हो जाएं जज़्बात!

हालांकि 60 फीसदी छात्रों को लगता है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से मानवीय रिश्तों और आपसी बातचीत में कमी आएगी, वहीं 59 फीसदी को चिंता है कि यह हमारी बुद्धिमत्ता पर भी असर डालेगा. इसके अलावा आधे से ज्यादा छात्रों का मानना है कि AI से वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होगा. इसकी वजह से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और हेल्थकेयर रिसर्च में तेजी आएगी. करीब 25 फीसदी छात्रों को लगता है कि AI से मेंटल हेल्थ सर्विसेज ज्यादा किफायती और सुलभ होंगी. ब्रिटेन में 43 फीसदी और वैश्विक स्तर पर 52 फीसदी नई पीढ़ी के छात्र AI का इस्तेमाल अपनी मानसिक शांति के लिए कर रहे हैं. छात्रों का यह भी कहना है कि AI का सबसे ज्यादा फायदा आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा. तो क्या भविष्य में रोबोट हमारे दिल और दिमाग के सबसे करीब होंगे?

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Prateeti Pandey

News18 में Offbeat डेस्क पर कार्यरत हैं. इससे पहले Zee Media Ltd. में डिजिटल के साथ टीवी पत्रकारिता भी अनुभव रहा है. डिजिटल वीडियो के लेखन और प्रोडक्शन की भी जानकारी . टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के सा…और पढ़ें

News18 में Offbeat डेस्क पर कार्यरत हैं. इससे पहले Zee Media Ltd. में डिजिटल के साथ टीवी पत्रकारिता भी अनुभव रहा है. डिजिटल वीडियो के लेखन और प्रोडक्शन की भी जानकारी . टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के सा… और पढ़ें

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