Home World पनडुब्बी में चंद घड़ियों के लिए ही ऑक्सीजन बाकी, अभी तक टाइटन का कोई पता नहीं

पनडुब्बी में चंद घड़ियों के लिए ही ऑक्सीजन बाकी, अभी तक टाइटन का कोई पता नहीं

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पनडुब्बी में चंद घड़ियों के लिए ही ऑक्सीजन बाकी, अभी तक टाइटन का कोई पता नहीं

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दुबई. अटलांटिक महासागर में ऐतिहासिक टाइटैनिक जहाज का मलबा देखने के रास्ते में लापता हुई पर्यटक पनडुब्बी की तलाश के लिए वक्त रेत की तरह फिसलता जा रहा है और बृहस्पतिवार सुबह तक भी उसका कुछ अता-पता नहीं चला है. ‘टाइटन’ नाम की इस लापता पनडुब्बी में चंद घड़ियों के लिए ही ऑक्सीजन बची है.

बचावकर्ताओं ने इस पनडुब्बी के लापता होने वाले स्थान पर और जहाज भेजे हैं ताकि दूसरे दिन इसकी तलाश के दौरान पानी के भीतर से आयी आवाज से उन्हें बचाव की दिशा तय करने में मदद मिले. टाइटन जब रविवार सुबह छह बजे अपनी यात्रा पर रवाना हुआ था तो चालक दल के पास केवल चार दिन के लिए ही ऑक्सीजन थी.

टाइटन पर सवार पांच पर्यटकों की सलामती की उम्मीद जताने वाले लोगों ने भी कई बाधाओं को लेकर आगाह किया है जिसमें पनडुब्बी की लोकेशन का पता लगाना, बचाव उपकरण के साथ उस तक पहुंचना तथा उसे सतह तक लाना शामिल है और यह सब कुछ पनडुब्बी में सवार यात्रियों की ऑक्सीजन आपूर्ति खत्म होने से पहले करना होगा.

बचावकर्ता समुद्र में 13,200 फुट की गहराई में कनेक्टिकट से दोगुने क्षेत्र में बचाव अभियान चला रहे हैं. फर्स्ट कोस्ट गार्ड डिस्ट्रिक्ट के कैप्टन जैमी फ्रेडरिक ने कहा कि प्राधिकारियों को अब भी पनडुब्बी पर सवार पांच यात्रियों को बचा लेने की उम्मीद है. समुद्र विज्ञानी डोनाल्ड मर्फी ने बताया कि उत्तर अटलांटिक महासागर में जिस जगह पर टाइटन रविवार को लापता हो गई थी, वह धुंध और तूफान के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है जिससे वहां खोज एवं बचाव अभियान चलाना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है.

इस बीच, ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं कि पनडुब्बी के विकास के दौरान उसकी सुरक्षा को लेकर कई चेतावनियां दी गई थीं. फ्रेडिरक ने बताया कि समुद्र से आयी आवाज से खोज का दायर सीमित करने का मौका मिला है, लेकिन सटीक लोकेशन पता नहीं चली है. उन्होंने कहा, ‘असल में हमें नहीं मालूम कि वह किस तरह की आवाज थी.’

टाइटैनिक का मलबा देखने के इस अभियान का नेतृत्व कर रही कंपनी के सीईओ स्टॉकटन रश, एक ब्रिटिश अरबपति, पाकिस्तान के एक कारोबारी घराने के दो लोग और एक टाइटैनिक विशेषज्ञ इस पनडुब्बी पर सवार हैं. ओशियनगेट एक्सपीडिशंस इस अभियान की निगरानी कर रही थी. कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, 2021 और 2022 में टाइटैनिक का मलबा देखने के लिए कम से कम 46 लोगों ने सफलतापूर्वक ओशियनगेट की पनडुब्बी में यात्रा की थी.

टाइटैनिक का मलबा देख चुके जर्मनी के सेवानिवृत्त कारोबारी आर्थर लोइबल ने दो साल पहले की इस रोमांचकारी यात्रा को ‘कामीकेज (आत्मघाती) अभियान’ बताया. उन्होंने कहा, ‘कल्पना कीजिए कि धातु की कुछ मीटर लंबी एक ट्यूब होती है. आप खड़े नहीं हो सकते. आप घुटने के बल नहीं बैठ सकते. सभी एक-दूसरे से चिपककर बैठते हैं. आप के अंदर किसी संकरी जगह में बैठने का डर नहीं होना चाहिए.’

उन्होंने बताया कि ऊर्जा बचाने के लिए पनडुब्बी में लाइट बंद कर दी जाती है और बस एक फ्लोरोसेंट ट्यूब से रोशनी आती है. आर्थर ने बताया कि बैटरी में समस्या और संतुलित भार के कारण उनकी यात्रा में बार-बार देरी हुई और उसमें कुल 10.5 घंटे लगे. इस पनडुब्बी पर सवार यात्रियों में ब्रिटिश अरबपति हामिश हार्डिंग, पाकिस्तानी नागरिक शहजादा दाऊद और उनका बेटा सुलेमान और टाइटैनिक विशेषज्ञ पॉल-हेनरी नार्गियोलेट शामिल हैं.

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