Home Life Style पन्ना रत्न किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं, जानें फायदे और नुकसान भी

पन्ना रत्न किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं, जानें फायदे और नुकसान भी

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पन्ना रत्न किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं, जानें फायदे और नुकसान भी

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ईशा बिरोरिया/ ऋषिकेश.उत्तराखंड में हरिद्वार के अलावा ऋषिकेश में भी उम्दा क्वालिटी के रत्न मिलते हैं. आज बात करेंगे पन्ना रत्न की. यह रत्न हर कोई धारण नहीं कर सकता. जहां इसके लाभ हैं, तो नुकसान भी. पन्ना मुख्यतः 5 रंगों में पाया जाता है. यह रत्न किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं यह जानना भी जरूरी है, क्योंकि कुंडली की जांच किए बगैर इसे पहनने के नुकसान भी हैं. पन्ना धारण करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है, साथ ही बुद्धि तेज होने लगती है.

Local 18 के साथ बातचीत में ऋषिकेश में स्थित उत्तराखंड हिमालयन जेम्स एंड हैंडीक्राफ्ट के मालिक अशोक बताते हैं कि गृह और राशि के अनुसार पहने गए रत्न हमें कई सारे लाभ देते हैं. पुखराज, मूंगा, माणिक, पन्ना, नीलम, मोती, गोमेद, हीरा और लहसुनिया मुख्य रत्न माने गए हैं. इन्हीं रत्नों को नवरत्न भी कहा जाता है. बाकी सभी उपरत्न कहलाते हैं. वहीं नौकरी और व्यापार में उन्नति के लिए लोग पन्ना रत्न धारण करते हैं. पन्ना धारण करने से वाणी प्रभावशाली हो जाती है और इच्छाओं की पूर्ति होती है.

पन्ना रत्न के फायदे और नुकसान

अशोक बताते हैं कि पन्ना रत्न बुध ग्रह की मजबूती के लिए पहना जाता है. इसे पहनने से व्यापार और नौकरी में उन्नति होती है, साथ ही आंखों को भी यह रत्न फायदा करता है. जब बुध हमारे नीच ग्रह पर बैठता है, तब आंखों की रोशनी कम होनी लगती है, जिसकी वजह से कम उम्र में चश्मा लग जाता है. वहीं पन्ना पहनने से आंखों की रोशनी बढ़ती है. बुध ग्रह के दोष को दूर करने के लिए यह रत्न पहना जाता है. वहीं बुध ग्रह का संबंध मां-बेटे और बाप-बेटे के रिश्ते से भी होता है. इस रत्न को पहनने से रिश्ता भी मजबूत होता है. वहीं अगर बुध की महादशा चल रही हो और बुध 8वें या 12वें भाव में बैठा हो, तो भी पन्ना पहनने से कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं. जानकार ज्योतिष से सलाह के बाद ही इस रत्न को धारण करना चाहिए.

पन्ना रत्न पहनने की विधि

पन्ना क्योंकि बुध ग्रह को मजबूत करता है, इसीलिए इस रत्न को बुधवार को पहना जाता है. पहनने से पहले मंगलवार की रात को इस रत्न को पंचामृत में भिगोकर रख दें. ऐसा करने से उस रत्न की प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है. अगले दिन यानी बुधवार की सुबह नित्यकर्मों से निवृत्त होकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना व प्रार्थना करने के बाद इसे धारण करना चाहिए.

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