Home World पाकिस्‍तान में क्‍यों बलूचों का निशाना बन रहे हैं चीनी नागरिक, कहीं चीन की ही कोई साजिश तो नहीं?

पाकिस्‍तान में क्‍यों बलूचों का निशाना बन रहे हैं चीनी नागरिक, कहीं चीन की ही कोई साजिश तो नहीं?

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पाकिस्‍तान में क्‍यों बलूचों का निशाना बन रहे हैं चीनी नागरिक, कहीं चीन की ही कोई साजिश तो नहीं?

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कराची: पाकिस्‍तान के बलूचिस्‍तान में इस समय जो कुछ भी हो रहा है, उसके बाद चीन को यह बात समझ में आ गई है कि उसके नागरिक यहां पर बेहद असुरक्षित हैं। बलूचिस्तान में स्थानीय लोगों के गंभीर शोषण की वजह से पिछले कुछ सालों में चीनी नागरिकों को बलूच विद्रोही समूहों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। ये चीनी नागरिक पाकिस्तान में कई अलग-अलग प्रोजेक्‍ट्स का हिस्‍सा हैं। चीन के विकास और इससे जुड़े कई इनफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स को बलूचों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इन प्रोजेक्‍ट्स के कारण बलूचों को अपने गांवों को छोड़ कर जाना पड़ रहा है। यही विस्‍थापन गुस्‍से को और भड़का रहा है।

विस्‍थापन की वजह है चीन
बलूचिस्‍तान में इस समय चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के कई प्रोजेक्‍ट्स चल रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के मुताबिक विकास के नाम पर हो रहे इस विस्‍थापन की असल वजह चीन ही है। ग्वादर बंदरगाह में चीन की मौजूदगी ने मौजूदा समस्याओं को बढ़ा दिया है। पिछले दिनों चीनी कर्मियों को ले जा रहे एक काफिले को बलूच विद्रोहियों ने निशाना बनाया था। पिछले साल, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के एक आत्मघाती हमलावर ने कराची यूनिवर्सिटी के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट से जुड़े तीन चीनी टीचर्स और उनके पाकिस्तानी ड्राइवर की हत्या कर दी थी।

दो साल में कई खतरनाक हमले
इसी तरह से साल 2021 में, ग्वादर में चीनी नागरिकों को ले जा रहे एक वाहन पर आत्‍मघाती हमला हुआ था। उसी साल खैबर पख्तूनख्वा के ऊपरी कोहिस्तान जिले में दासू हाइड्रोपावर प्‍लांट के पास एक बस हमले में 13 व्यक्तियों की जान चली गई, जिनमें नौ चीनी कर्मचारी भी थे। अप्रैल 2021 में भी बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में सेरेना होटल के बाहर एक आत्मघाती हमलावर ने हमला किया। इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। चीन-पाकिस्तान संबंधों के एक विशेषज्ञ के अनुसार, निशाना पाकिस्तान में चीनी राजदूत नोंग रोंग थे, जिन्होंने होटल में चेक इन किया था। बलूचिस्तान के रणनीतिक महत्व के साथ-साथ इसके प्राकृतिक संसाधनों ने सीपीईसी और इसके अहम हिस्‍से ग्वादर बंदरगाह जैसे प्रोजेक्‍ट्स की वजह से स्थायी तनाव और संघर्ष को जन्म दिया।

भारी मुनाफा कमाता चीन

चीनी सैन्य मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, ग्वादर बंदरगाह, बीजिंग को हिंद महासागर क्षेत्र तक रास्‍ता देता है। जबकि क्षेत्र में एक मिलिट्री बेस की संभावनाओं को भी मजबूत करता है। बंदरगाह को पूरी तरह से पाकिस्‍तान की सरकार ऑपरेट करती है। यहां पर सिर्फ चीनी नागरिकों को ही रोजगार दिया गया है और किसी भी स्थानीय व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया है। जानकारों की मानें तो बलूचिस्‍तान के सैंडक में सोने की खदान भी चीनियों को मालामाल कर रही है। इस खदान को चीन की तरफ से ही संचालित किया जाता है।

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