Home Life Style पितृ पक्ष की 3 तिथियां हैं महत्वपूर्ण, भूलकर भी न करें ये गलती, वरना पितरों का मिलेगा श्राप!

पितृ पक्ष की 3 तिथियां हैं महत्वपूर्ण, भूलकर भी न करें ये गलती, वरना पितरों का मिलेगा श्राप!

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पितृ पक्ष की 3 तिथियां हैं महत्वपूर्ण, भूलकर भी न करें ये गलती, वरना पितरों का मिलेगा श्राप!

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हाइलाइट्स

पितृ पक्ष में भरणी श्राद्ध पंचमी तिथि को हो तो बहुत ही अच्छा होता है.
किसी भी परिजन की मृत्यु के एक साल बाद भरणी श्राद्ध करना जरूरी है.
पितृ पक्ष के नवमी श्राद्ध को मातृ श्राद्ध या मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है.

पितृ पक्ष का प्रांरभ 29 सितंबर से हो रहा है. पितृ पक्ष पितरों के आशीर्वाद प्राप्ति का पखवाड़ा होता है. इसमें 16 दिन होते हैं. हर साल भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ पक्ष प्रारंभ होता है और आश्विन अमावस्या पर पितृ पक्ष का समापन होता है. पितृ पक्ष में 3 तिथियों का विशेष महत्व है. उसमें आप अपने पितरों की तृप्ति के लिए कई कार्य करते हैं, जिससे वे खुश होकर आपको आशीर्वाद देते हैं. यदि आप पितृ पक्ष में इन तिथियों पर पितरों के लिए कुछ नहीं करते हैं तो आपको वे श्राप भी दे सकते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं पितृ पक्ष की 3 महत्वपूर्ण तिथियों के बारे में.

पितृ पक्ष की 3 महत्वपूर्ण तिथियां कौन सी हैं?
वैसे तो पितृ पक्ष की सभी तिथियां महत्व वाली हैं क्योंकि हर तिथि पर किसी न किसी के पितर का देहांत हुआ होता है और वे उनके लिए श्राद्ध, तर्पण आदि करते हैं. लेकिन पितृ पक्ष में भरणी श्राद्ध, नवमी श्राद्ध और सर्व पितृ अमावस्या या अमावस्या श्राद्ध की तिथियां महत्वपूर्ण हैं.

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1. भरणी श्राद्ध: पितृ पक्ष में भरणी श्राद्ध पंचमी तिथि को हो तो बहुत ही अच्छा होता है. उस तिथि पर दोपहर में भरणी नक्षत्र का होना जरूरी है, तभी भरणी श्राद्ध का महत्व होता है. इस बार भरणी श्राद्ध 2 अक्टूबर को चतुर्थी श्राद्ध के साथ है, उस दिन भरणी नक्षत्र सुबह से शाम 06:24 पी एम तक है.

किसी भी परिजन की मृत्यु के एक साल बाद भरणी श्राद्ध करना जरूरी है. जिन लोगों की मृत्यु कुंवारे होती है, उनका श्राद्ध पंचमी तिथि में करते हैं और उस दिन भरणी नक्षत्र हो तो और भी अच्छा होता है. इसके अतिरिक्त जो अपने जीवनकाल में तीर्थ यात्रा नहीं करता है, उसके लिए गया, पुष्कर आदि में भरणी श्राद्ध करना होता है, ताकि उसे मोक्ष प्राप्त हो सके.

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2. नवमी श्राद्ध: पितृ पक्ष के नवमी श्राद्ध को मातृ श्राद्ध या मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है. इस साल 7 अक्टूबर को नवमी श्राद्ध है. इस तिथि पर परिवार की माता पितरों जैसे कि मां, दादी, नानी पक्ष का श्राद्ध करते हैं. यह दिन माता पितरों को समर्पित होता है. यदि आप इस दिन उनके लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध आदि नहीं करते हैं तो वे नाराज हो जाएंगी. इससे आपको पितृ दोष लग सकता है.

3. सर्व पितृ अमावस्या या अमावस्या श्राद्ध: आश्विन अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या या अमावस्या श्राद्ध होता है. इस वर्ष 14 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या है. सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन पितरों के लिए श्राद्ध करते हैं, जिनके निधन की ​ति​थि मालूम नहीं होती है या आप को अपने पितर ज्ञात नहीं हैं. ऐसे में आप सर्व पितृ अमावस्या के ​दिन अपने सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण आदि करते हैं.

पितृ पक्ष में न करें ये गलती
पितृ पक्ष में भरणी श्राद्ध, नवमी श्राद्ध और सर्व पितृ अमावस्या की श्राद्ध को नहीं छोड़ना चाहिए. इसमें आप अपने परिवार के पितरों का श्राद्ध करके उनको तृप्त करते हैं, उनको मोक्ष दिलाने का प्रयास करते हैं. यदि आप इन तिथियों पर अपने पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, पंचबलि कर्म, दान आदि नहीं करते हैं तो आपको उनकी नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है. इसके कारण आपके परिवार के सुख और शांति में व्यवधान पड़ सकता है.

Tags: Dharma Aastha, Pitru Paksha

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