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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्राइमरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार के उद्देश्य से उन्हें रचनात्मक अंदाज में पढ़ाया जाएगा। इससे छात्रों की सोचने और समझने की क्षमता विकसित होगी। इसके लिए दिल्ली के 62 सर्वोदय विद्यालयों में कांट लर्निंग प्रोसेस (केएलपी) की मदद से पढ़ाने की पहल की गई है, जिसका हिस्सा कक्षा दूसरी से लेकर पांचवीं के छात्र होंगे। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय की नर्सरी प्राइमरी ब्रांच ने सर्कुलर जारी किया है। इसके अनुसार कांट प्रक्रिया छात्रों के प्रतियोगी स्थापना के निरंतर मूल्यांकन पर आधारित है। इसके तहत कक्षा को कई समूह में विभाजित किया जाएगा। मेरिट के आधार पर छात्रों को टीवी के समक्ष बिठाया जाएगा। जिस पर त्वरित प्रश्नोत्तरी प्रदर्शित की जाएगी। छात्र ही प्रतिस्पर्धी छात्रों के उत्तर की जांच करेंगे।
तीन विषयों को किया शामिल
एक घंटे के समय में 15 से 25 प्रश्नोत्तरी होंगी। इस संबंध में ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि इससे छात्रों के सीखने के स्तर की प्रक्रिया में सुधार होगा। इसमें अंग्रेजी, विज्ञान और गणित विषय को शामिल किया गया है।
तनाव मुक्त सीखने का मिलेगा माहौल
छात्रों के सीखने के स्तर को हल्का बनाया है। जिससे उन्हें सोचने और समझने में आसानी हो। यह प्रक्रिया योग्यता आधारित और तनाव मुक्त सीखने के माहौल जैसे वीडियो गेम बनाकर शिक्षक से छात्रों को सीखने का दायित्व स्थानांतरित करता है।
केएलपी को लेकर 16 समन्यवक नामित
कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 16 समन्वयक नामित किए गए हैं। प्रत्येक समन्वयक को तीन-चार स्कूल आवंटित किए गए है। साथ ही तुगलकाबाद स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय को कांट प्रोसेस सिस्टम स्थापित करने के लिए चिन्हित किया गया है। जिसमें एक से अधिक टीवी होंगे। इस संबंध में 28 दिसंबर को चयनित स्कूलों के 124 शिक्षकों को तीन घंटे के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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