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दिलीप चौबे/कैमूर. पकोड़ा ऐसा चटपटा व्यंजन है, जिसे हर सीजन में लोग खाना पसंद करते हैं. उसमें भी सरसों तेल में छना हुआ गरमा-गरम बेसन का पकोड़ा खाने को मिल जाए तो क्या कहने. अमूमन बेसन में प्याज़ मिक्स कर बनने वाला पकोड़ा लोग चाव से खाते हैं. हालांकि, कई स्थानों पर बगैर लहसुन प्याज के भी पकोड़ा खाने को मिलता है. अगर आपका मूड में है और बिना प्याज और लहसुन के पकोड़े खाना चाहते हैं तो आपको मां मुंडेश्वरी धाम के पास आना होगा. यहां अनूप कश्यप लोगों को पकोड़ा खिलाते हैं. अनूप की दुकान में आपको सामान्य पकोड़े के अलावा आलू और पालक से बने पकोड़े भी खाने को मिलेगा. दूर-दराज इलाके से आने वाले लोग यहां रुक कर पकोड़ा जरूर खाते हैं. बेसन और भुना हुआ जीरा से बनने वाले पकोड़े अधिक खस्ता और स्वादिष्ट होने के चलते लोग चाव से खाते हैं.
बिना लहसुन और प्याज के पकोड़े
अनूप कश्यप ने बताया कि शाम के वक्त नाश्ते के लिए लोग यहां पकोड़े खाने के लिए इंतजार करते हैं. मां मुंडेश्वरी धाम के पास रोजाना स्टॉल लगते हैं. यहां बिहार हीं नहीं बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग मां का दर्शन के लिए आते हैं. इसलिए लोगों को बिना लहसुन और प्याज के पकोड़े ही खिलाया जाता है. पकोड़ी खाने आए ग्राहक मुन्ना लाल ने बताया कि आरा के रहने वाले हैं. यहां के मसालेदार और चटपटा पकोड़े का स्वाद बेहद लाजवाब है. आमतौर पर आलू और पालक से बने पकोड़े को बिहार और बंगाल में काफी अधिक पसंद किया जाता है. इसलिए शाम के वक्त लोगों को उनका पसंदीदा पकड़ा खिलाया जाता है.
20 से 25 किलो पकोड़े की है रोजाना खपत
उन्होंने ने बताया कि पिछले 25 साल से यहां अपना स्टॉल लगाकर पकोड़े की बिक्री कर रहे हैं. उन्होंने बताता कि एक किलो मसालेदार पकोड़ी की कीमत 160 रुपए है और हर रोज इस दुकान से लगभग 20 से 25 किलो मसालेदार पकोड़े की खपत होती है. लाल चटनी के साथ लोगों को पकोड़े खाने देते हैं. पकोड़े बनाने की प्रक्रिया को लेकर दुकानदार ने बताया कि सबसे पहले वह आलू और पालक को अच्छी तरह से धोकर बारीक काट लेते हैं. बेसन में भुना हुआ जीरा, सौंफ और इलायची को मिक्स करते हैं. वहीं, आखिर में हल्दी और अलग-अलग मसाले मिलाने के बाद तेल में पकोड़े को छानकर लाल चटनी के साथ ग्राहक को गरमा-गरम परोसते हैं.
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FIRST PUBLISHED : October 23, 2023, 13:32 IST
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