Home Life Style भूलकर भी इन दो दिशाओं में मुंह करके ना करें भोजन, जान लें शास्त्रों में कही गई ये ज़रूरी बात

भूलकर भी इन दो दिशाओं में मुंह करके ना करें भोजन, जान लें शास्त्रों में कही गई ये ज़रूरी बात

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भूलकर भी इन दो दिशाओं में मुंह करके ना करें भोजन, जान लें शास्त्रों में कही गई ये ज़रूरी बात

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हाइलाइट्स

हिंदू शास्त्रों में भोजन करने के नियम बताए गए हैं.
शास्त्रों के अनुसार, हमेशा पूर्व व उत्तर दिशा में ही मुंह करके भोजन करना चाहिए.
पश्चिम व दक्षिण दिशा में मुंह करके भोजन करना आसुरी माना गया है.

हिंदू शास्त्रों में पूजा- पाठ के अलावा दैनिक जीवन जीने की विधि का भी उल्लेख है. इनमें भोजन करने के नियम भी शामिल हैं, जो महाभारत, विष्णु पुराण, वामन पुराण व स्कन्द पुराण, वशिष्ठ व पाराशर स्मृति सहित कई ग्रंथों में बताए गए हैं. उन्हीं में से आज हम आपको भोजन के दिशा नियम बता रहे हैं, जिसका पालन नहीं करने पर भोजन प्रेत या आसुरी होने की मान्यता है.

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भोजन करने की सही दिशा
पंडित रामचंद्र जोशी
के अनुसार, भोजन करते समय दिशा का ध्यान जरूर रखना चाहिए. भोजन हाथ- पैर धोने के बाद हमेशा पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके ही करना चाहिए. इस संबंध में विष्णु पुराण में ‘प्राड्मुखोदड्मुखो वापि’ व वसिष्ठ स्मृति में ‘प्राड्मुखन्नानि भुञ्जीत’ का जिक्र है, जिसका अर्थ यही है कि भोजन हमेशा पूर्व व उत्तर में मुंह करके ही करना चाहिए.

दक्षिण व पश्चिम में निषेध
पंडित जोशी के अनुसार, दक्षिण व पश्चिम दिशा में मुंह करके कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए. इस संबंध में वामन पुराण कहता है कि-
‘भुञ्जीत नैवेह च दक्षिणामुखो न च प्रतीच्यामभिभोजनीयम्.. यानी दक्षिण की तरफ मुंह करके भोजन नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से उसमें राक्षसी प्रभाव आ जाता है. इसी तरह पश्चिमी दिशा में मुंह करके भोजन करना रोग को बुलावा देना माना गया है.

महाभारत में लिखा है-
यद् वेष्टितशिरा भुङ्क्ते यद् भुङ्क्ते दक्षिणामुख: . सौपानत्कश्च यद् भुङ्क्ते तद् वै रक्षांसि भुञ्जते..
यानी जो सिर में वस्त्र लपेटकर, दक्षिण की ओर मुंह करके और जूते पहनकर भोजन करता है, उसका सारा भोजन आसुरी समझना चाहिए.

इसी तरह स्कन्द पुराण के अनुसार-
अप्रक्षालितपादस्तु यो भुङ्क्ते दक्षिणामुख:.
यो वेष्टितशिरा भुङ्क्ते प्रेता भुञ्जन्ति नित्यश: ..
यानी जो पैर धोए बिना खाता है, दक्षिण की ओर मुंह करके व सिर पर वस्त्र लपेटकर भोजन करता है, उसके अन्न को सदा प्रेत ही खाते हैं.

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धन व आयु में होता है लाभ
पंडित जोशी के अनुसार, पूर्व व उत्तर में मुंह करके भोजन करने से व्यक्ति की आयु व धन में लाभ होता है. इस संबंध में पद्मपुराण में लिखा है कि-

प्राच्यां नरो लभेदायुर्याम्यां प्रेतत्वमुश्नुते. वारुणे च भवेद्रोगी आयुर्वित्तं तथोत्तरे..
यानी पूर्व की तरफ मुख करके खाने से मनुष्य की आयु बढ़ती है. दक्षिण की तरफ मुंह करके खाने से प्रेतत्व की प्राप्ति होती है. पश्चिम की तरफ मुख करके खाने से मनुष्य रोगी होता है और उत्तर की और मुख करके खाने से आयु तथा धन की प्राप्ति होती है.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Dharma Culture

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