बदलती जीवनशैली और खानपान में गड़बड़ी की वजह से कई बार हम ऐसी बीमारी के शिकार हो जाते हैं जिसके बारे में कल्पना करना भी मुश्किल होता है. एक ऐसी ही बीमारी का नाम है ‘मेल ब्रेस्ट कैंसर’. पहली नजर में हम सभी को यह अटपटा लगता है कि जो अंग मर्दों में होता ही नहीं, उस अंग में कैंसर कैसे हो सकता है. लेकिन, यह सच्चाई है और आज बड़ी संख्या में मर्द भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ब्रेस्ट कैंसर के हर 100 मामले में से एक ‘मेल ब्रेस्ट कैंसर’ का है. इसी से आप अनुमान लगा सकते हैं कि कितनी तेजी से यह बीमारी हमारे बीच अपनी पैठ बना रही है.
क्या है ‘मेल ब्रेस्ट कैंसर’
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर एक बेहद कॉमन बीमारी हो गई है. लेकिन, अब मर्द भी इसके शिकार होने लगे हैं. 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वक्त में देश में ब्रेस्ट कैंसर के जितने मामले सामने आ रहे हैं, उनमें से 0.5 से 1 फीसदी तक ‘मेल ब्रेस्ट कैंसर’ के केस हैं. अहमदाबाद के न्यूबर्ग सेंटर फॉर जिनोमिक सेंटर में मॉलेक्यूलर ऑन्कोपैथोलॉजिस्ट डॉ. कुंजल पटेल कहती हैं कि हाल के कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि मेल ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. जबकि पहले ऐसे केस छिटपुट मिलते थे. इंडियन एक्स्प्रेस न्यूजपेपर ने डॉ. कुंजल पटेल से बातचीत के आधार पर बीते साल 21 अक्टूबर को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. डॉ. कुंजल 2020 के एक सर्वे के हवाले से बताती हैं कि सबसे बड़ी समस्या इस बारे में जागरुकता का अभाव है. उन्होंने बताया कि 78 फीसदी लोगों को मेल ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जानकारी नहीं है. डॉ. कुंजल बताती हैं कि इसके पीछे कई कारण हैं. इसमें सबसे अहम है लाइफस्टाइल. इसके बाद फैमिली हिस्ट्री और जेनेटिक्स भी इसके लिए जिम्मेदार हैं.
टेस्टोस्टेरॉन का सेवन एक बड़ा कारण
इसी मसले पर हमने बात की सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर मृणाल पाहवा से. डॉ. पावहा गंगाराम में डिपार्टमेंट ऑफ यूरोलॉजी और रेनल ट्रांसप्लांट के कंसल्टेंट हैं. डॉ. पाहवा बताते हैं कि जब कोई युवा आकर्षक दिखने या बॉडी बनाने के लिए डॉक्टर की सलाह के बिना टेस्टोस्टेरॉन (testosterone) बढ़ाने वाली दवाइयों या सप्लिमेंट्स का सेवन करता है, तो उसे इसके साइड इफेक्ट भी झेलने पड़ते हैं. इस कारण उसमें प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. टेस्टोस्टेरॉन, मेल हार्मोन होता है. इसी कारण मर्दों में दाढ़ी, मूछ और मर्दानगी जैसी चीजें आती हैं. टेस्टोस्टेरॉन एक तरह से ताकत का प्रतीक है. युवा अपनी ताकत दिखाने के लिए अतिरिक्त टेस्टोस्टेरॉन का सेवन करने लगे हैं. डॉ. पावहा बताते हैं कि सामान्य स्थिति में किसी भी मर्द में टेस्टोस्टेरॉन की कमी नहीं होती. लेकिन, युवा पीढ़ी जिम से लेकर स्पोर्ट्स और बेड रूम में परफॉर्मेंस में कथित बेहतरी के लिए टेस्टोस्टेरॉन ले रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है. इसका सबसे बड़ा साइ़ड इफेक्ट प्रोस्टेट और मेल ब्रेस्ट कैंसर के रूप में सामने आ रहा है.
मेल ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
डॉ. पटेल बताती हैं कि आमतौर पर मर्दों में इस बीमारी की जानकारी देर से होती है. दरअसल, इसके पीछे का कारण मर्दों का अपनी ब्रेस्ट को लेकर निश्चिंत रहना है. वे ब्रेस्ट में किसी लंप (Lump) यानी उसके बढ़ने या सूजन को लेकर अनभिज्ञ रहते हैं. इसे अभी भी बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती है. आमतौर पर 60 की उम्र के बाद इसको लेकर खतरा पैदा होता है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह जोखिम और बढ़ जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर मामले 70 से 75 वर्ष की उम्र के बीच पाए जाते हैं. इस दौरान महिलाओं की तरह पुरुषों के निपल से भी तरल पदार्थ डिस्चार्ज होने लगता है.
ऐसे मर्दों को खतरा ज्यादा
डॉ. पटेल बताती हैं कि जिनके माता-पिता कैंसर से पीड़ित रहे हैं उन पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसमें एस्ट्रोजीन (estrogen) का लेवल बढ़ना सबसे बड़ा कारण है. दरअसल, एस्ट्रोजीन (estrogen) मूलतः फीमेल हार्मोन होता है, लेकिन कुछ मात्रा में यह मर्दों में भी पाया जाता है. जब मर्द में इस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है तो उनमें ब्रेस्ट बनने लगता है. उम्र बढ़ने के साथ मर्दों में भी यह बढ़ता है और इस कारण स्पर्म काउंट कम हो जाता है. इसके अलावा कुछ खास जिन्स के कारण भी मेल ब्रेस्ट कैंसर के मामले देखे जा रहे हैं.
बीमारी होने से पहले इलाज!
डॉ. पाहवा और डॉ. पटेल दोनों बताते हैं कि आमतौर पर उम्रदराज लोगों में यह बीमारी पाई जाती है, लेकिन जिन लोगों की फैमिली हिस्ट्री में कैंसर रहा है उन्हें ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग करवा लेनी चाहिए. इससे बीमारी होने के पहले ही इसकी जानकारी मिल जाती है और उचित समय पर ही इसका इलाज संभव हो जाता है.
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FIRST PUBLISHED : January 18, 2023, 15:04 IST