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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद दानिश अली ने शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद रमेश बिधूड़ी की उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर लगे ‘सवाल के बदले रिश्वत’ के आरोप के मामलों में अलग-अलग मापदंड अपनाए गए हैं जो संसदीय प्रक्रियाओं का उल्लंघन है। उन्होंने यह दावा भी किया कि आचार समिति के प्रमुख विनोद कुमार सोनकर ने मोइत्रा के मामले में सार्वजनिक रूप से बयान देकर नियम 275 का उल्लंघन किया है।
अली खुद आचार समिति के सदस्य हैं। लोकसभा सदस्य अली ने बिरला को विशेषाधिकार मामलों और नैतिक कदाचार से संबंधित मामलों में किसी अन्य सदस्य के खिलाफ शिकायतकर्ता सदस्य के साक्ष्य के संबंध में स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं के उल्लंघन को लेकर पत्र लिखा है। अली ने पत्र में कहा, ”पूरे सम्मान के साथ मैं आपका ध्यान विशेषाधिकार हनन और नैतिक कदाचार से संबंधित मामलों में संसदीय प्रक्रियाओं के घोर उल्लंघन की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। आप इस तथ्य से अवगत होंगे कि मैंने 22 सितंबर को विशेषाधिकार हनन का एक नोटिस दिया था, जिसमें सांसद रमेश बिधूड़ी द्वारा मेरे खिलाफ अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था।”
उनका कहना है, ”स्थापित प्रक्रिया के अनुसार शिकायतकर्ता सदस्य को सबसे पहले विशेषाधिकार समिति के समक्ष बुलाया जाता है और उसके बाद ही सदस्य/आरोपी व्यक्ति को साक्ष्य के लिए बुलाया जाता है। हालांकि, सभी निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करते हुए, जिस सदस्य पर मेरे खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का आरोप है, उसे बुलाया गया प्रतीत होता है और यह इस तथ्य से साबित होता है कि मुझे अब तक समिति में अपना पक्ष रखने के लिए नहीं बुलाया गया है। दूसरी ओर ऐसा दिखाई देता कि आचार समिति ने (महुआ मोइत्रा के मामले में) उचित प्रक्रिया का पालन किया है।” अली ने यह भी कहा कि महुआ मोइत्रा से संबंधित मामले में भी मीडिया से यह जानना बहुत दुखद है कि समिति के अध्यक्ष ने खुले तौर पर मीडिया से बात करते हुए कहा है कि उन्हें तृणमूल की सांसद के खिलाफ कथित नैतिक कदाचार की शिकायत के संबंध में एक हलफनामा मिला है। उन्होंने दावा किया, ” मैं इसे किसी और के द्वारा नहीं, बल्कि आचार समिति के अध्यक्ष (विनोद कुमार सोनकर) द्वारा नियम 275 के उल्लंघन के रूप में देखता हूं।” मोइत्रा के खिलाफ शिकायत करने वाले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को आचार समिति ने मौखिक साक्ष्य के लिए 26 अक्टूबर को बुलाया है।
अली ने दावा किया, ” मुझे यह भी आश्चर्य है कि एक तरह के नोटिस/शिकायत के मामलों में दो तरह की प्रक्रियाओं का पालन कैसे किया जा रहा है।” उन्होंने कहा, ” मैं आपसे प्रक्रियाओं के मौजूदा उल्लंघनों पर विचार करने का अनुरोध करता हूं और आपसे आग्रह करता हूं कि आप संबंधित अधिकारियों को निर्देश दें कि वे मुझे समिति के समक्ष अपना साक्ष्य देने के लिए सबसे पहले बुलाएं ताकि मैं तथ्यों को सीधे रिकॉर्ड पर रख सकूं।” ‘चंद्रयान-3′ की सफलता और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां’ विषय पर लोकसभा में चर्चा के दौरान गत 21 सितंबर को बिधूड़ी ने अली के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद, खुद दानिश अली के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सांसद सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अपरूपा पोद्दार, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोई और विपक्ष के कई अन्य सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर बिधूड़ी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
इन सांसदों ने मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का भी आग्रह किया था। दूसरी तरफ, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और रवि किशन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर दावा किया था कि पहले अली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने भी इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का आग्रह किया था। लोकसभा अध्यक्ष ने सभी शिकायतों को विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया था।
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