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हिंदू कैलेंडर के अनुसार, महेश नवमी हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है. इस साल महेश नवमी के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग की वजह से यह दिन और भी विशेष बन जााएगा. इन योगों में किए गए पूजा, पाठ, जप, तप आदि का शुभ फल प्राप्त होगा. हालांकि महेश नवमी के दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं प्राप्त हो रहा है. उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं कि महेश नवमी कब है? महेश नवमी का मुहूर्त, शुभ योग और महत्व क्या है?
महेश नवमी 2025 तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, महेश नवमी के लिए आवश्यक ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि 3 जून को रात 9 बजकर 56 मिनट पर प्रारंभ होगी. इस तिथि का समापन 4 जून को रात 11 बजकर 54 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर महेश नवमी 4 जून दिन बुधवार को मनाई जाएगी.
3 शुभ योग में महेश नवमी 2025
ज्योतिषाचार्य डॉ. तिवारी के अनुसार, इस बार की महेश नवमी पर 3 शुभ योग बन रहे हैं. सबसे पहले बात करते हैं रवि योग की. महेश नवमी पर रवि योग पूरे दिन है. वहीं सिद्धि योग सुबह में 8 बजकर 29 मिनट से प्रारंभ होगा, जो उसके बाद पूरे दिन है. उससे पहले वज्र योग होगा.
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नवमी तिथि में सर्वार्थ सिद्धि योग 5 जून को तड़के 03 बजकर 35 मिनट से प्रात: 05 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. उस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 5 जून को तड़के 03 बजकर 35 मिनट तक है, उसके बाद से हस्त नक्षत्र है.
महेश नवमी 2025 मुहूर्त
महेश नवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:02 ए एम से 04:43 ए एम तक है. इस समय में स्नान और दान उत्तम माना जाता है. विजय मुहूर्त दोपहर में 02 बजकर 38 मिनट से 03 बजकर 34 मिनट तक है. नवमी का निशिता मुहूर्त रात में 11 बजकर 59 मिनट से देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक है. महेश नवमी पर पूरे दिन रवि योग बना है, ऐसे में आप सूर्योदय 05:23 ए एम से पूजा पाठ प्रारंभ कर सकते हैं. वैसे भी भगवान भोलेनाथ की पूजा में मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होते हैं क्योंकि वे स्वयं काल से परे हैं.
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महेश नवमी का महत्व
लोकमान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि को माहेश्वरी समाज अस्तित्व में आया था. ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि को भगवान महेश्वर यानि शिव की कृपा से माहेश्वरी समाज के पूर्वज ऋषियों के श्राप से मुक्त हुए थे और नया जीवन प्राप्त किया था.
इस कारण से ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि को महेश नवमी मनाई जाने लगी. इस दिन माहेश्वरी समाज के लोग भगवन शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं. अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं और लोगों को शुभकामनाएं देते हैं. माहेश्वरी समाज भगवान शिव को अपना कुल देवता मानता है. शिव आज्ञा से यह समाज क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य हो गया.
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