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हाइलाइट्स
‘वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक’ 1 से लेकर 7 अगस्त तक सेलिब्रेट किया जाता है.
पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट लॉस में ब्रेस्टफीडिंग कराना काफी हेल्दी होता है.
World Breastfeeding Week 2023: प्रत्येक वर्ष पूरी दुनिया में ‘वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक’ 1 से लेकर 7 अगस्त तक सेलिब्रेट किया जाता है. एक शिशु के लिए मां का दूध 6 महीने की उम्र तक ही संपूर्ण आहार होता है. स्तनपान कराने से ना सिर्फ शिशुओं को मां के दूध के जरिए सभी पौष्टिक तत्व मिलते हैं, बल्कि एक ब्रेस्टफीड कराना मां की सेहत पर भी पॉजिटिव असर डालता है. बचपन से यदि बच्चे को मां का दूध मुख्य आहार के रूप में ना मिले तो उसके फिजिकल और मेंटल हेल्थ प्रभावित हो सकता है. इससे विकास सही से नहीं होता है. स्तनपान ना करने वाले शिशु उन शिशुओं की तुलना में अधिक कमजोर और बीमार पड़ते हैं, जिन्हें ब्रेस्टफीड नहीं कराया जाता है. आइए जानते हैं ब्रेस्टफीड कराने से मां के साथ ही शिशु की सेहत पर होने वाले फायदों के बारे में.
स्तनपान कराने से होने वाले मां-शिशु को फायदे
1. फोर्टिस हीरानंदानी हॉस्पिटल (वाशी, नवी मुंबई) की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिशियन डॉ. मंजिरी मेहता कहती हैं कि बच्चे के जन्म से लेकर 6 महीने की उम्र तक के लिए मां का दूध ही संपूर्ण आहार होता है. इस दौरान शिशु को पानी भी नहीं पिलाया जाता है. बच्चा जितना मां का दूध पिएगा, उतना ही शारीरिक रूप से स्ट्रॉन्ग होगा. हालांकि, आज भी कई मांओं को डिलीवरी के बाद प्रॉपर दूध का प्रोडक्शन नहीं हो पाता है, जिस वजह से शिशु को ऊपर का दूध देना पड़ता है. कुछ ऐसी भी महिलाएं होती हैं, जो ये सोचती हैं कि ब्रेस्टफीड कराने से उनका ब्रेस्ट खराब हो जाएगा, वे मोटी हो जाएंगी. ऐसा बिल्कुल नहीं है, बल्कि स्तनपान कराना एक नई बनी मां की सेहत के लिए भी बेहद जरूरी होता है.
2. जब आप अपने शिशु को दूध पिलाती हैं तो इससे वजन बढ़ता नहीं, बल्कि कम होता है. दूध का प्रोडक्शन सही हो और आप शिशु को अपना दूध ना पिलाएं तो ये दूध ब्रेस्ट में रहने से आपको दर्द हो सकता है. ब्रेस्ट इससे टाइट हो जाते हैं. जब आप अपना दूध शिशु को पिलाती हैं तो इस प्रॉसेस के दौरान कैलोरी की जरूरत पड़ती है. इस तरह से शरीर से कैलोरी को कम किया जा सकता है.
3. डॉ. मंजिरी मेहता कहती हैं कि ब्रेस्टफीड कराने से महिलाओं में कई तरह की गंभीर बीमारियों जैसे स्तन कैंसर, ऑस्टियोपोरोसिस, हाई ब्लड प्रेशर, दिल के रोग, डायबिटीज, गठिया, ओवेरियन कैंसर, मोटापा आदि के होने का रिस्क काफी हद तक कम हो जाता है.
4. शिशु को ब्रेस्टफीड कराने से ब्रेस्ट मिल्क के जरिए सभी आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति होती है. शिशु कई गंभीर रोगों, इंफेक्शन जैसे कान, आंख, रेस्पिरेटरी इंफेक्शन, अस्थमा, दस्त, पेट संबंधित समस्याओं, मोटापा, एलर्जी आदि से बचा रह सकता है. ब्रेस्ट मिल्क में एंटीबॉडीज होने के कारण वायरल, बैक्टीरियल इंफेक्शन से शिशु का बचावा होता है. मां का दूध पीने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. शिशु का ब्रेन तेजी से डेवलप होता है.
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5. प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर का वजन काफी बढ़ता है. शरीर में कैलोरी, फैट एकत्रित हो जाता है, जिसे आप ब्रेस्टफीडिंग के जरिए काफी हद तक कम कर सकती हैं. पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट लॉस में ब्रेस्टफीडिंग कराना काफी हेल्दी होता है. इससे जमी हुई कैलोरी आसानी से बर्न हो सकती है. ऐसे में आप वजन कम करने के लिए अपने शिशु को अपना दूध जरूर पिलाएं, ताकि आपका वजन भी कम हो और शिशु भी स्वस्थ रहे.
6. डॉ. मंजिरी के अनुसार, जब आप अपना दूध शिशु को पिलाती हैं तो उस दौरान प्रोलैक्टिन नामक हॉर्मोन का स्राव होता है, जिससे आपका मन और मूड दोनों ही शांत और रिलैक्स महसूस करता है. साथ ही पोस्ट प्रेग्नेंसी हॉर्मोनल इंबैलेंस भी संतुलित होते हैं. आप पहले से अधिक एनर्जेटिक महसूस कर सकती हैं.
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ब्रेस्टफीडिंग कराने के समय ध्यान रखें कुछ बातें
शिशु को राइट ब्रेस्ट से ब्रेस्टफीड कराएं तो हमेशा शिशु को उल्टे हाथ से पकड़ें और सीधे हाथ से स्तन को पकड़कर ब्रेस्टफीड कराएं. आप थकान महसूस करें तो पीठ के बल लेटकर और शिशु को अपने ऊपर लिटाकर अपना दूध पिला सकती हैं. क्रॉस क्रेडिल पोजीशन यानी शिशु को गोद में लेकर दूध पिलाना बेस्ट होता है. पहली बार ब्रेस्टफीड करा रही हैं तो कपड़े ढीले पहनें. इससे आपको बार-बार कपड़े हटाने में समस्या नहीं आएगी. ब्रेस्टफीड के दौरान शिशु के सिर और पीठ को अपने हाथों से सपोर्ट जरूर दें. दूध पिलाने से पहले साफ कपड़े या कॉटन से ब्रेस्ट को पोछ लें. सी-सेक्शन से डिलीवरी हुई है तो इस दौरान बैठकर दूध पिलाने में थोड़ी तकलीफ महसूस हो सकती है. ऐसे में अपनी डॉक्टर से जरूरी सलाह लें.
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Tags: Breastfeeding, Health, Lifestyle, World Breastfeeding Week
FIRST PUBLISHED : August 01, 2023, 08:00 IST
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