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हाइलाइट्स
एंडोमेट्रिओसिस ऐसी ही एक बीमारी है जिसमें महिलाओं का पूरा प्रजनन अंग प्रभावित हो सकता है
इसमें गर्भाशय की लाइनिंग में अवांछित टिशू बेतरतीब तरीके से चारों ओर बढ़ते जाते हैं.
Endometriosis Symptoms: मां बनना हर महिला का सबसे बड़ा सपना होता है लेकिन इस राह में कई बाधाएं सामने आती हैं. हालांकि मां बनने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं और इसमें पुरुष भी जिम्मेदार हो सकते हैं लेकिन महिलाओं के प्रजनन अंगों में कई ऐसी बीमारियां होती हैं, जिनके कारण प्रेग्नेंसी में तरह-तरह की दिक्कतें आती हैं. एंडोमेट्रिओसिस ऐसी ही एक बीमारी है जिसमें महिलाओं का पूरा प्रजनन अंग प्रभावित हो सकता है. इस बीमारी के कारण महिलाओं को काफी दर्द से गुजरना पड़ता है क्योंकि गर्भाशय की लाइनिंग में अवांछित टिशू बेतरतीब तरीके से चारों ओर बढ़ते जाते हैं. यह लाइनिंग इस तरह बढ़ती जाती है कि समूचे प्रजनन अंग यानी अंडाशय (ओवरी), फेलोपियन टयूब और यहां तक कि पूरे पेल्विस को अपनी चपेट में ले लेती है.
अगर एंडोमेट्रोओसिस का जल्दी इलाज नहीं कराया जाए तो प्रेग्नेंसी होने में कई तरह की जटिलताएं आएंगी और गंभीर स्थिति पर गर्भाशय निकालने तक की नौबत भी आ सकती है. जब एक बार महिला के शरीर से गर्भाशय निकल जाता है तो फिर हमेशा के लिए मां बनने का सपना चकनाचूर हो सकता है.
क्या होता है एंडोमेट्रिओसिस
सर गंगाराम अस्पताल में वरिष्ठ गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी नायर बताती हैं कि एंडोमेट्रिओसिस में गर्भाशय की लाइनिंग (एंडोमेटेरियन) यूट्रस से बाहर निकलकर आसपास जमा होने लगती है. यह लाइनिंग सेल्स के बने होते हैं जो यूट्रस के पीछे, फेलोपियन ट्यूब में, ओवरी या लिगामेंट्स में जमा होने शुरू हो जाते हैं. जब महिलाओं में पीरियड्स होते हैं, तब खून निकलता है और इस अतिरिक्त लाइनिंग से भी खून निकलने लगता है. खून की ज्यादा मात्रा के कारण यह एरिया काफी भारी हो जाता है और दोनों खून मिलकर आसपास की चीजों को चिपकाने लगता है. इससे काफी दर्द देता है.
क्यों नहीं पाती मां
डॉ. साक्षी नायर ने बताया कि ओवरी में जो सेल्स जमा होने लगते हैं इससे सिस्ट बनने लगता है. जब पीरियड्स आते हैं तब ये स्सिट पतला होकर टूटने लगते हैं और इसमें से ब्लीडिंग होने लगता है. चूंकि ये शरीर से बाहर नहीं निकल सकते, इसलिए वहीं फंस जाते हैं और सिस्ट धीरे-धीरे बढ़कर प्रजनन अंगों को एक-दूसरे के साथ चिपकाने लगते हैं. डॉ. साक्षी नायर कहती हैं कि इन सब प्रक्रियाओं में फाइब्रोसिस होने लगता है और धीरे-धीरे खून जमा होकर यूट्रस के पीछे दोनों ओवरी को चिपका देता है. इससे काफी एडीशन होने लगते हैं. इस कारण फेलोपियन ट्यूब भी उसी में चिपक जाता है. इससे प्रजनन अंगों का पूरा सिस्टम हिल जाता है. इस स्थिति में अंडा बनकर भी खराब हो जाता है. कभी-कभी यूट्रस पीछे की तरफ इतना खींच जाता है कि इससे सिस्ट बाहर निकलकर अंतरियों के अंदर पहुंचने लगता है. इससे लिगामेंट और नर्व में दिक्कत होने लगती है.
एंडोमेट्रिओसिस के कारण
डॉ. साक्षी नायर कहती हैं कि एंडोमेट्रिओसिस किस कारण होता है, इसका सटीक कारण आज तक किसी को पता नहीं है. लेकिन इसे लेकर कई थ्योरी है. एक थ्योरी यह है कि जब मैन्स्ट्रअल क्रैंप होता है तब पेल्विस सिकुड़ता है. इस दौरान फेलोपियन ट्यूब में से सेल्स निकलकर एब्डोमिनल केविटी में पहुंच जाते हैं, वहां से ये ओवरी, लंग्स में भी पहुंच सकते हैं.
एंडोमेट्रोओसिस के लक्षण बेहद पेनफुल
1.पेनफुल पीरियड्स-डॉ. साक्षी नायर बताती हैं कि जब एंडोमेट्रोओसिस किसी महिला को होता है तो बहुत ज्यादा दर्द होता है. जब भी पीरियड्स आते हैं पूरे पेल्विक एरिया में क्रैंपिंग होता है जिसके कारण बेपनाह दर्द होता है. यहां तक कि पीरियड्स से बहुत पहले और पीरियड्स के बहुत बाद तक भी दर्द होते रहता है. लोअर बैक और पेट में भी दर्द महसूस होता है.
2.फिजिकल रिलेशन में दर्द– अगर किसी महिला को एंडोमेट्रोओसिस है तो संबंध बनाने के दौरान भी बहुत दर्द होता है.
3. पेशाब के दौरान दर्द-जब महिलाएं पीरियड्स में होती है तब पेट में थोड़ा सा भी कुछ हुआ कि दर्द उठना शुरू हो जाता है. इसके अलावा पेशाब करने के समय भी दर्द होता है.
4. बहुत अधिक ब्लीडिंग-पीरियड्स के समय बहुत अधिक ब्लीडिंग होती है या पीरियड्स के बीच में भी बहुत अधिक ब्लीडिंग होती है.
5. प्रेग्नेंसी नहीं होना-एंडोमेट्रोओसिस होने के कारण बहुत से मामले में प्रेग्नेंसी होने में दिक्कत होती है.
6. अन्य लक्षण-इस दौरान थकान, डायरिया, ब्लॉटिंग, कॉन्स्टिपेशन, जी मिजलाना जैसी समस्याएं भी हो सकती है.
इलाज क्या है
डॉ. साक्षी नायर ने बताया कि एंडोमैट्रोओसिस का इलाज है. इसके लिए सबसे पहले हम पीरिएड्स रोकने की हार्मोनल दवा देते हैं. अगर इससे ठीक नहीं हुआ तो सिस्ट को निकालने के लिए सर्जरी भी की जा सकती है. अगर इस सबका भी कोई असर नहीं हुआ है तो आखिर में यूट्रस निकालना पड़ता है. इसका मतलब हुआ कि प्रभावित महिला कभी मां नहीं बन सकती.
किन महिलाओं को है ज्यादा खतरा
डॉ. साक्षी नायर कहती हैं कि चूंकि अब तक इसका सटीक कारण पता नहीं चला लेकिन कुछ स्थितियों में माना जाता है कि इससे एंडोमेट्रोओसिस का जोखिम बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि ज्यादा उम्र में शादी इसका सबसे प्रमुख कारण हो सकता है. क्योंकि मां बनने की आदर्श उम्र 30 से पहले ही है. कुछ थ्योरी में यह कही जाती है कि पीरियड्स जल्दी आने या मेनोपॉज देर से होने पर एंडोमेट्रोओसिस का खतरा ज्यादा रहता है. वहीं 27 दिनों से कम में पीरियड्स आना और 7 दिनों से ज्यादा तक पीरियड्स का रहना भी इसका कारण हो सकता है. हालांकि ये सब थ्योरी हैं, सटीक कारण नहीं है.
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Tags: Health, Health tips, Lifestyle
FIRST PUBLISHED : April 19, 2023, 13:56 IST
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