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Diamond Rain: अगर आपको पता चले कि कहीं पर ‘हीरा’ का बारिश होने वाला है, तो आपको भरोसा होगा, नहीं न? लेकिन यह सच है. धरती से बाहर अंतरिक्ष में हीरों की बारिश होती है. एक नए प्रयोग से पता चला है कि अंतरिक्ष में सैकड़ों बाह्य ग्रहों पर हीरों की बारिश होने की संभावना है. यह काफी लो टेंपरेचर पर ग्रहों के कोर के अंदर मौजूद बेहद संपीड़ित कार्बन यौगिकों से बना हो सकता है.
अमेरिका में किये गए प्रयोग के अनुसार, यूरेनस, जूपिटर और नेपच्यून जैसे बर्फीले विशाल ग्रहों के पर हीरे की बारिश एक सामान्य घटना बन सकती है. इससे पहले भी इन ग्रहों की परिस्थितियों को क्रिएट करके हीरों के बारिश के बारे में कई अध्ययन किया गया था, जिसमें सभी के परिणाम एक जैसे आए थे.
अमेरिका में हुआ शोध
अमेरिका में शोध करने वाले फ्रॉस्ट की टीम बर्फीले ग्रहों पर संपीड़ित कार्बन की स्थितियों का अध्ययन करने के लिए स्थैतिक संपीड़न और गतिशील हीटिंग का उपयोग किया. फ्रॉस्ट की टीम ने पॉलीस्टाइनिन को संपीड़ित किया, पॉलिमर जिसका उपयोग स्टायरोफोम बनाने के लिए किया जाता है. फिर टीम ने दो हीरों के बीच पॉलीस्टाइनिन को निचोड़ा और फिर उस पर एक्स-रे प्रकाश की बौछार की. इसके परिणाम ने उनके होश को ही उड़ा दिया.
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5600 में से 1900 पर हीरों की बारिश
टीम ने देखा कि लगभग 2200 डिग्री सेल्सियस के तापमान और 19 गीगापास्कल के दबाव पर पॉलीस्टाइनिन से हीरे धीरे-धीरे बन रहे हैं, जो यूरेनस और नेपच्यून के अंदरूनी हिस्सों के समान हैं. इसके बाद उनकी टीम ने निष्कर्ष निकाला कि कई छोटे ग्रहों पर हीरे की बारिश की संभावना है. शोधकर्ताओं ने कहा कि कुल 5600 पुष्टि किए गए एक्सोप्लैनेट में से 1900 से अधिक पर हीरे की बारिश हो सकती है.

इसका मतलब है कि सौर मंडल के भीतर, हीरे पहले की तुलना में कम गहराई पर बन सकते हैं. इससे विशाल ग्रहों के आंतरिक भाग के बारे में हमारी समझ भी बदल सकती है.
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FIRST PUBLISHED : January 11, 2024, 22:42 IST
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