[ad_1]
हाइलाइट्स
सफला एकादशी का व्रत पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखते हैं.
सफला एकादशी पूजा मुहूर्त: 7 जनवरी, रविवार, सुबह 08:33 एएम से 12:27 पीएम तक.
सफला एकादशी का व्रत 7 जनवरी को है. यह साल 2024 का पहला एकादशी व्रत है. यदि आपको किसी मनोवांछित कार्य में सफलता प्राप्त करनी है तो आपको सफला एकादशी का व्रत करना चाहिए. इस व्रत को करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और कार्य में सफलता प्रदान करते हैं. विष्णु पूजा के समय सफला एकादशी की व्रत कथा जरूर पढ़ें. इससे व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है और व्रत का महत्व भी पता चलता है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं सफला एकादशी व्रत कथा के बारे में. सफला एकादशी का पूजा मुहूर्त और पारण समय क्या है?
सफला एकादशी 2024 मुहूर्त और पारण समय
सफला एकादशी का व्रत पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखते हैं.
पौष कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ: 7 जनवरी, रविवार, 12:41 एएम से
पौष कृष्ण एकादशी तिथि का समापन: 8 जनवरी, सोमवार, 12:46 एएम पर
सफला एकादशी पूजा मुहूर्त: सुबह 08:33 एएम से 12:27 पीएम तक
सफला एकादशी का पारण समय: 8 जनवरी, 07:15 एएम से 09:20 एएम तक
द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय: रात 11:58 पीएम पर
ये भी पढ़ें: नए साल में 2 बार है सफला एकादशी, ऐसा क्यों? जानें विष्णु पूजा का मुहूर्त, व्रत पारण समय और महत्व
सफला एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, चम्पावती नगरी के राजा महिष्मान थे. उनके 4 बेटे थे, उनमें सबसे बड़ा बेटा लुम्पक दुराचारी था. मांस-मदिरा का सेवन करता और संत, ऋषि, मुनि, देवी, देवता आदि का अपमान करता था. उसके आचारण से राजा परेशान थे. एक दिन उन्होंने उसे महल से निकाल दिया तो वह चोरी करने लगा. उसकी आदतों से नगरवासी भी परेशान थे.
पास के वन में एक पीपल का पेड़ था, जिसकी नगरवासी पूजा करते थे. लुम्पक उस पेड़ के नीचे रहने लगा. पौष कृष्ण दशमी तिथि को रात में उसे ठंड लग रही थी क्योंकि उसके पास पर्याप्त कपड़े न थे. वह सर्द रात में सोया था, सर्दी के कारण शरीर अकड़ गया. अगले दिन सुबह एकादशी को जब सूरज निकला तो दोपहर में उसे गर्मी लगी तो उठा. वह भूखा था. वह वन में खाने की तलाश में चला गया.
ये भी पढ़ें: नए साल की पहली एकादशी कब है? यहां देखें सफला से लेकर मोक्षदा तक एकादशी व्रत लिस्ट
भूख और प्यास से वह कमजोर हो गया था, इसलिए वह शिकार नहीं कर पाया. वन से फल लेकर उसी पीपल के पेड़ के नीचे आ गया. तब तक अंधेरा हो गया था. उसने फलों को रखा और बोला “हे नाथ! यह फल आपको निवेदित, अब इन्हें खुद ही खाओ.” उस रात वह जागता रहा. उसे अपने पहले के किए गए पाप कर्मों पर पश्चाताप हो रहा था. उसने भगवान से क्षमा मांगी.
श्रीहरि विष्णु उसके अनजाने में किए गए व्रत से प्रसन्न हुए. उन्होंने लुम्पक के पापों को नष्ट कर दिया. तभी आकाशवाणी हुई, “हे लुम्पक! तुम्हारे व्रत से खुश होकर श्रीहरि ने तुम्हारे सभी पाप नष्ट कर दिए हैं, अब तुम महल लौट जाओ और अपने पिता को राजकाज में मदद करो. राजा का पद संभालो.”
यह सुनकर लुम्पक ने भगवान विष्णु के नाम का जयकार किया और अपने महल लौट गया. उसके पिता ने उसे राजा बनाया तो वह धर्म के मार्ग पर चलने लगा और राजपाट चलाने लगा. एक योग्य और सुंदर कन्या से उसका विवाह हुआ. उसे अच्छी संतान मिली. श्रीहरि की कृपा से जीवन के अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई. जो व्यक्ति सफला एकादशी का व्रत रखकर विष्णु पूजा करता है, उसे जीवन में सफलता मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है.
.
Tags: Dharma Aastha, Ekadashi, Lord vishnu
FIRST PUBLISHED : January 6, 2024, 12:34 IST
[ad_2]
Source link