Home Life Style सर्वार्थ सिद्धि योग में बुध प्रदोष आज, जानें शिव पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त और व्रत विधि, महादेव सभी मनोकामनाएं करेंगे पूरी

सर्वार्थ सिद्धि योग में बुध प्रदोष आज, जानें शिव पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त और व्रत विधि, महादेव सभी मनोकामनाएं करेंगे पूरी

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सर्वार्थ सिद्धि योग में बुध प्रदोष आज, जानें शिव पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त और व्रत विधि, महादेव सभी मनोकामनाएं करेंगे पूरी

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हाइलाइट्स

बुध प्रदोष व्रत रखने और शिव पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रात: 05 बजकर 02 मिनट से रात 08 बजकर 56 मिनट तक.
हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है.

वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत आज 3 मई बुधवार को है. यह बुध प्रदोष व्रत है. इस व्रत को रखने और शिव पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. प्रदोष व्रत को करने से धन, धान्य, संपत्ति, संतान, आरोग्य आदि की प्राप्ति होती है. प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय में करते हैं. आज बुध प्रदोष व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बना है. सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग में जो भी कार्य करते हैं, वह सफल होता है, इसलिए आज आप इस योग में शिव आराधना करके अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं. आपको सफलता प्राप्त होगी. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट बता रहे हैं प्रदोष व्रत के शिव पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त, व्रत और पूजा विधि.

बुध प्रदोष व्रत 2023 मुहूर्त
वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि का शुभारंभ: 2 मई, मंगलवार, रात 11:17 बजे से
वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि का समापन: आज, 3 मई, बुधवार, रात 11:49 बजे
शिव प्रदोष पूजा मुहूर्त: आज, शाम 06 बजकर 12 मिनट से रात 08 बजकर 22 मिनट तक
पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त: शाम 07:33 बजे से रात 08:54 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रात: 05 बजकर 02 मिनट से रात 08 बजकर 56 मिनट तक
रवि योग: रात 08 बजकर 56 मिनट से कल सुबह 05 बजकर 02 मिनट तक
रुद्राभिषेक का समय: प्रात:काल से लेकर रात 11 बजकर 49 मिनट तक

बुध प्रदोष व्रत और पूजा विधि
आज सुबह से बुध प्रदोष का व्रत रखा जाएगा. प्रात: सूर्योदय के समय स्नान और ध्यान से निवृत हो जाएं. फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें. उसके बाद बुध प्रदोष व्रत और शिव पूजा का संकल्प करें. दिनभर भगवान शिव की भक्ति और भजन में समय दें. फलाहार पर रहें. शाम को प्रदोष काल में महादेव की पूजा करें. यह पूजा आप घर पर या शिव मंदिर में कर सकते हैं.

शाम को शुभ मुहूर्त में ओम नम: शिवाय के उद्घोष के साथ भगवान शिव शंकर का गंगाजल और गाय के दूध से अभिषेक करें. फिर भोलेनाथ को अक्षत्, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, धतूरे का फूल, फूल, माला, मदार पुष्प, सफेद चंदन, शहद, शक्कर, धूप, गंध, दीप, नैवेद्य, फल आदि अर्पित करें.

इसके बद शिव चालीसा और बुध प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें. व्रत कथा को पढ़ने से व्रत का महत्व पता चलता है और उसका पूरा लाभ मिल पाता है. फिर आप भगवान शिव की विधिपूर्वक आरती करें. क्षमा प्रार्थना के बाद महादेव से मनोकामना पूर्ति के लिए आशीर्वाद लें.

रात्रि में जागरण करके अगले दिन सुबह पारण करें और व्रत को पूरा कर लें. पारण करने से ही व्रत पूरा होता है.

शिव पूजा में ध्यान देने वाली बातें
शिव पूजा में हल्दी, नारियल, तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल, सिंदूर आदि नहीं चढ़ाते हैं. अभिषेक करते समय जल या गाय के दूध को धीरे-धीरे गिराते हैं. शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा नहीं करते हैं. आधी परिक्रमा के बाद वापस लौट जाते हैं. शिव पूजा में शंख का उपयोग नहीं करते हैं.

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