Home Life Style सोशल मीडिया पर इतने मिनट की बना लेंगे दूरी तो इन 4 बीमारियों से मिल जाएगी मुक्ति, रिसर्च में सामने आई बात

सोशल मीडिया पर इतने मिनट की बना लेंगे दूरी तो इन 4 बीमारियों से मिल जाएगी मुक्ति, रिसर्च में सामने आई बात

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सोशल मीडिया पर इतने मिनट की बना लेंगे दूरी तो इन 4 बीमारियों से मिल जाएगी मुक्ति, रिसर्च में सामने आई बात

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हाइलाइट्स

सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं में मानसिक समस्याएं बढ़ती जा रही है.
सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करने से एंग्जाइटी का लेवल कम हो गया.

Stop Using Social Media: सोशल मीडिया अधिकांश लोगों के लिए इस दौर का सबसे बड़ा नशा है. कुछ लोग तो घंटों इसके चंगुल में फंसे रहते हैं और कुछ अन्य काम भी नहीं करते. बेशक इससे कुछ जानकारियां भी मिलती है लेकिन अगर इसे आदत बना दी जाए, तो इसके कई नुकसान भी है. अब तक कुछ अमीर देशों में मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए थेरेपी भी दी जाने लगी है. कुछ अध्ययनों में भी यह बात सामने आई है कि सोशल मीडिया से जितना फायदा है, उससे कहीं ज्यादा उससे नुकसान है. इसी कड़ी में एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि अगर सोशल मीडिया के इस्तेमाल में रोजाना 30 मिनट की कमी कर दी जाए तो अकेलापन, दुनिया से खो जाने का डर, एंग्जाइटी और डिप्रेशन की बीमारी बहुत जल्दी दूर हो सकती है.

यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स पर अध्ययन
यह अध्ययन ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकन साइकलॉजिकल एसोसिएशन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं में मानसिक समस्याएं बढ़ती जा रही है. ग्लोबल डायबेट्स कम्युनिटी के मुताबिक स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस संबंध एक अध्ययन किया. इस अध्ययन में यूनिवर्सिटी के ही 230 कॉलेज स्टूडेंट्स को शामिल किया गया. इन लोगों को रोजाना के अपने सोशल मीडिया इस्तेमाल को 30 मिनट तक कम करने के लिए कहा गया. दो सप्ताह तक ऐसा करने के लिए कहा गया. हर दिन इसकी रिपोर्ट करनी होती थी. दो सप्ताह के बाद विभिन्न परीक्षणों के आधार पर पाया गया कि इन लोगों में डिप्रेशन और एंग्जाइटी का लेवल बहुत कम था.

व्यवहार में परिवर्तन हुआ
अध्ययन में शामिल लोगों में जीवन के प्रति सकारात्मकता बढ़ गई जबकि अन्य लोग जिन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल बदस्तूर जारी रखा, उनमें जीवन के प्रति सकारत्मकता के साथ एंग्जाइटी और डिप्रेशन भी बढ़ा हुआ था. प्रमुख शोधकर्ता एला फॉलहेबर ने कहा, अध्ययन के परिणाम हमारे लिए भी चौंकाने वाला था. अध्ययन में शामिल विद्यार्थियों ने न केवल एक पक्ष के प्रति सकारात्म रुख दिखाया बल्कि जीवन के विविध आयामों में उनका सकारात्मक दृष्टिकोण बनते हुए देखा गया.

इन लोगों के व्यवहार में परिवर्तन देखा गया. उन्होंने कहा कि अध्ययन का मकसद यह नहीं था कि सोशल मीडिया पर बिताए जा रहे समय को कम कर पूरी तरह से मुकम्मल हो जाना है बल्कि एक प्रयास भर करना था और इससे यह पता लगाना था कि इसका क्या फर्क पड़ा. हालांकि शुरुआत में अध्ययन में शामिल लोगों को सोशल मीडिया पर समय कम करना बहुत मुश्किल था लेकिन धीरे-धीरे प्रयास करने के बाद उन्हें इससे खुशी मिलने लगी और इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला.

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Tags: Health, Health tips, Lifestyle, Social media

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