Home Life Style स्वाद का सफ़रनामा: शरीर के लिए बेहद गुणकारी है हरड़, आयुर्वेद ने माना है अमृत औषधि, दिलचस्प है इसका इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा: शरीर के लिए बेहद गुणकारी है हरड़, आयुर्वेद ने माना है अमृत औषधि, दिलचस्प है इसका इतिहास

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स्वाद का सफ़रनामा: शरीर के लिए बेहद गुणकारी है हरड़, आयुर्वेद ने माना है अमृत औषधि, दिलचस्प है इसका इतिहास

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हाइलाइट्स

आयुर्वेदिक पुस्तकों के साथ ही निघंटुओं में भी हरड़ का वर्णन मिलता है.
हरड़ कफ, मधुमेह, बवासीर, कुष्ठ, सूजन आदि रोगों को दूर करने में मदद करती है.

Swad Ka Safarnama:भोजन को हजम करने या कहें कि आसानी से पचाने के लिए भारत में त्रिफला चूर्ण का जिक्र अवश्य होता है. यह चूर्ण सिर्फ भोजन को ही ‘मुलायम’ नहीं करता, बल्कि शरीर के लिए भी बेहद हितकारी है. त्रिफला के तीन घटकों में हरड़ भी शामिल है. यह सूखा फल बेहद लाभकारी है. इसकी विशेषता यह है कि यह शरीर को फिट रखता है और पाचन शक्ति में मदद करता है. स्किन का ग्लो बनाए रखने के लिए भी हरड़ को बेहतर माना जाता है. भारत में हजारों वर्षों से अनेकों रूपों में हरड़ का प्रयोग किया जा रहा है.

निघंटु ग्रंथों मे है इसका विस्तार से वर्णन

भोजन के रूप में हरड़ का उपयोग यह है कि इसे रात को पानी में भिगोकर उस पानी को सब्जी पकाने के लिए डाल जाए तो सब्जी शरीर के लिए माकूल हो जाएगी. भोजन का स्वाद अलग सा हो जाएगा. असल में यह एक फल है जिसके कई प्रकार के उपयोग हैं. हरड़ तीन प्रकार की मानी जाती है. इसका जो फल कच्चा, गुठली पड़ने से पहले ही तोड़ लिया जाए, उसे छोटी हरड़ कहा जाता है. इसका रंग स्याह और पीला होता है. जो फल आधे पके हुए तोड़े जाते हैं, उनका रंग पीला होता है और पूरे पके हुए फल को बड़ी हरड़ कहा जाता है. इन तीनों के अलग-अलग उपयोग हैं लेकिन तीनों की शरीर के लिए बेहद लाभकारी हैं. इसे संस्कृत में हरीतकी भी कहा जाता है और भारत की नई पुरानी आयुर्वेदिक पुस्तकों के साथ-साथ निघंटुओं में इसका विस्तार से वर्णन है.

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भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में हरड़ का विस्तार से वर्णन है. Image-canva

निघंटु वे ग्रंथ हैं जिनमें प्राचीन काल में एकल औषधीय पादकों से मिलने वाली जानकारी है. इसमें व्याधियों के लक्षण और उनके निदान को समझाया गया है. लगभग बीस निघंटु हैं, जो 1000 ईसा पूर्व से लेकर ईसा पूर्व 800 या 700 अनेक लिखे गए. विभिन्न निघंटुओं में सात प्रकार की हरीतकी का वर्णन मिलता है. राज बल्लभ निघंटु ने हरड़ की विशेषता में कहा है कि ‘यस्य माता गृहे नास्ति, तस्य माता हरीतकी. कदाचिद् कुप्यते माता, नोदरस्था हरीतकी॥‘ यानी हरीतकी मनुष्यों की माता के समान हित करने वाली है. माता तो कभी-कभी कुपित भी हो जाती है, परन्तु उदर स्थिति अर्थात् खायी हुई हरड़ कभी भी अपकारी नहीं होती.

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शुद्ध रूप से भारत का आयुर्वेदिक फल

हरड़ शुद्ध रूप से भारत का फल है, जिसका वर्णन करीब तीन हजार ईसा पूर्व से आयुर्वेद में किया जा रहा है. इसका पेड़ देश के निचले हिमालय क्षेत्र में रावी तट से लेकर पूर्व बंगाल-असम तक पाया जाता है. हिन्दी में इसे ‘हरड़’ और ‘हर्रे’ भी कहते हैं. आयुर्वेद ने इसे अमृता, प्राणदा, कायस्था, विजया, मेध्या आदि नामों से जाना जाता है. हरीतकी को वैद्यों ने चिकित्सा साहित्य में अत्यधिक सम्मान देते हुए उसे अमृतोपम औषधि कहा है. तिब्बती साहित्य में इसका वर्णन पाया जाता है. ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शती में लिखे गए भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में हरड़ का विस्तार से वर्णन है. इस ग्रंथ में त्रिफला बनाने की विधि बताई गई है. उस विधि में हरड़ के गुणों का विस्तार से वर्णन है. इसके अलावा ग्रंथ के उत्तरो भाग: के रसायनपाद अध्याय में भी हरड़ का अलग से डिटेल में वर्णन किया गया है.

ग्रंथ के अनुसार हरड़ में लवण (नमक) रस को छोड़कर शेष पांच रस पाए जाते हैं. यह गरम है, लेकिन लाभकारी है. पाचन प्रक्रिया को सुधारती है और लंबी आयु देती है. यह बुद्धि और इंद्रियों (मसल्स) को बल प्रदान करती है. यह कई रोग जैसे अफारा, दमा, हृदयरोग, पाइल्स, अतिसार, पीलिया, कफ सहित में राहत पहुंचाती है.

त्रिदोष को कम करने में मदद करती है हरड़

आयुर्वेद में आज भी हरीतकी का प्रयोग किया जा रहा है. भारतीय जड़ी-बूटियों, फलों व सब्जियों पर व्यापक रिसर्च करने वाले जाने-माने आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य बालकिशन के अनुसार हरीतकी कफ तथा अम्ल के अलावा वात दोष को नियंत्रित करने में मदद करती है. देखा जाय तो यह तीनों दोषो को कम करने में सहायता करती है. यह रूखी, गर्म, भूख बढ़ाने वाली, बुद्धि को बढ़ाने वाली, नेत्रों के लिए लाभकारी, आयु बढ़ाने वाली, शरीर को बल देने वाली है. यह कफ, मधुमेह, बवासीर (अर्श), कुष्ठ, सूजन, पेट का रोग, कृमि रोग, स्वरभंग, कब्ज आदि को दूर करने में मदद करती है.

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हरत कफ और अम्ल के साथ ही वात दोष को भी कंट्रोल करने में मदद करती है. Image-Canva

विशेष बात यह है कि आधुनिक चिकित्साशास्त्र भी हरड़ को प्रभावी मानता है. उसका कहना है कि इसमें ऐसे तत्व होते हैं जिन्हें कैंसर रोधी, जीवाणुरोधी, मधुमेह रोधी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों सहित हीलिंग गुणों के लिए जाना जाता है. यह आवश्यक विटामिन, खनिज और प्रोटीन युक्त बहुत ही पौष्टिक होती है.

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इसलिए अमृत औषधि कहा जाता है इसे

हरड़ के गुणों के बारे में मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन व वैद्यराज दीनानाथ उपाध्याय का कहना है कि आयुर्वेद में इसके गुण जगजाहिर हैं, इसलिए इसे अमृत औषधि माना जाता है. असल में यह एंटिऑक्सीडेंट से भरपूर है, इसलिए इसमें अधिकतर रोगों से लड़ने की क्षमता है. इसका नियमित सेवन शरीर को फिट रखता है. तीनों प्रकार के रोगों का यह शमन करती है. इसमें पाए जाने वाले विशेष तत्व त्वचा की कांति बनाए रखते हैं, इस कारण शरीर में झुर्रियां देर से आती हैं. यह भूख को नियंत्रण में रखती है. चूंकि इसमें एक साथ पांच रस पाए जाते हैं, इसलिए यह मधुमेह को भी कंट्रोल करती है. यह रक्त का साफ करती है, उसके चलते हृदय और मांसपेशियां मजबूत व स्वस्थ रहती हैं. इसका उपयोग धमनियों में वसा को नहीं जमने देता है. सामान्य मात्रा में सेवन करने पर इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है. अधिक मात्रा में लेने पर यह मुंह बकबका कर देगी साथ ही उलटी करने का भी मन करने लगेगा.

Tags: Food, Lifestyle

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