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स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि पहले रामचरितमानस का पाठ दलितों, पिछड़ों व आदिवासियों के द्वारा कराया जाता था। जब उन्हें पता लगा कि इसमें हमारे अपमान की बात कही गई है हमें प्रताड़ित करने की बात कही गई है
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