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Osteoporosis in Young : हड्डियों की बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस आमतौर पर बुजुर्गों को होने वाली बीमारी है लेकिन आजकल यह 40-50 साल की उम्र में भी होने लगी है. इस बीमारी के कारण हड्डियों में हमेशा फ्रेक्चर रहने का खतरा रहता है. ऐसे में अगर सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो मुश्किलें ज्यादा बढ़ जाती है. ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं. इस कारण ृमामूली गिरने या रोज़मर्रा की गतिविधियों से भी फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ जाता है. यह तब होता है जब नई हड्डी बनने की प्रक्रिया पुरानी हड्डी के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाती. इससे हड्डी का घनत्व घटता है और उसकी संरचना कमजोर होती है. इसे अक्सर साइलेंट डिज़ीज़ कहा जाता है क्योंकि अधिकतर लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता जब तक कोई हड्डी न टूट जाए.
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण
टीओआई की खबर में ऑर्थोपेडिक डॉ. वासुदेव एन प्रभु बताते हैं कि शुरुआती चरणों में ऑस्टियोपोरोसिस के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते. लेकिन जैसे-जैसे हड्डी कमजोर होती है,कई तरह के लक्षण दिख सकते हैं. इस बीमारी में पीठ दर्द काफी होता है. यह टूटी या दब गई रीढ़ की हड्डी के कारण हो सकता है. रीढ़ की हड्डियों के संपीड़न फ्रैक्चर के कारण समय के साथ हाइट कम हो सकती है. रीढ़ की कमजोर हड्डियों के कारण आगे की ओर झुकाव आ सकता है. मामूली टक्कर या गिरने से भी हड्डियाँ टूट सकती हैं, खासकर कूल्हे, कलाई और रीढ़ में. ऑस्टियोपोरोसिस के कारण थकावट और पूरे शरीर में दर्द रहता है.
किन लोगों का ज्यादा खतरा
कई कारक ऑस्टियोपोरोसिस की आंशका को बढ़ा सकते हैं. आमतौर पर यह बीमारी 60 साल के बाद होती है लेकिन आजकल 50 साल से कम उम्र के युवाओं में भी यह बीमारी होने लगती है. महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा रहता है. खासकर महिलाओं में रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण ऐसा होता है.अगर माता-पिता या भाई-बहनों को यह रोग है तो इसका जोखिम बढ़ जाता है. छोटे कद या पतली काया वाले लोगों की हड्डियों का द्रव्यमान कम होता है. इसलिए ऐसे लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा रहता है. अगर लंबे समय तक कैल्शियम की कमी है तो हड्डियां कमजोर होती हैं जिसके कारण इस बीमारी का खतरा रहता है. विटामिन डी की कमी में इस बीमारी का प्रमुख कारण है. कुछ बीमारियों की स्थिति में जैसे कि हार्मोनल गड़बड़ियां, ऑटोइम्यून रोग और पाचन संबंधी रोग में भी इसका खतरा रहता है.
इन आदतों से भी यह बीमारी
जो लोग हमेशा बैठे रहते हैं. शारीरिक व्यायाम कम करते हैं, उन लोगों की हड्डियां कमजोर होती हैं. वहीं स्मोकिंग करने वाले लोगों को भी इसका खतरा रहता है. इसके अलावा बहुत कम भोजन और कम वजन से भी हड्डियां कमजोर होती हैं. अगर किसी कारण से आंत की सर्जरी होती है तो भी इस बीमारी का खतरा रहता है.
ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए क्या करें
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए जीवनभर हेल्दी आदतें अपनाना जरूरी है. इसके लिए संतुलित आहार लें. भोजन में पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन करें. जैसे डेयरी उत्पाद, हरी सब्जियाँ, फैटी मछली, और फोर्टिफाइड फूड्स आदि. नियमित व्यायाम करें. वॉकिंग, रनिंग, डांसिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हड्डियों को मजबूत बनाते हैं. हमेशा वजन को कंट्रोल रखें. बहुत कम वजन भी नहीं होना चाहिए. अल्कोहल का सेवन भी सीमित करें. अगर आपकी हड्डियों कमजोर है तो डॉक्टर से जरूर दिखाएं.
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