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ईसाई समुदाय के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस की ओर से गाजा पट्टी पर जारी हमलों को लेकर चिंता जताना इजरायल को नागवार गुजरा है। रविवार की प्रार्थना के बाद वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने मानवाधिकारों की बात करते हुए हिंसा रोकने की अपील की थी। उन्होंने कहा, ‘इजरायल और फिलिस्तीन में जो हुआ है, उसे लेकर मुझे बहुत दर्द है।’ पोप फ्रांसिस का यह बयान गाजा को इजरायल की ओर से सीज किए जाने के कुछ दिनों के बाद सामने आया है। गाजा से अब तक 4 लाख लोग पलायन कर चुके हैं और सैकड़ों की संख्या में लोग मारे गए हैं।
पोप फ्रांसिस के बयान में गाजा को लेकर चिंता जताए जाने पर इजरायल ने आपत्ति जताई है। इजरायल के विदेश मंत्री एली कोहेन ने कहा, ‘इजरायल यह उम्मीद करता है कि वेटिकन सिटी को अपनी स्पष्ट राय के साथ सामने आना चाहिए। उसे बिना किसी लाग-लपेट के ही हमास की ओर से बेगुनाह लोगों की हत्या की निंदा करनी चाहिए। हमास ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों तक को नहीं छोड़ा। ये कत्ल सिर्फ इसलिए किए गए क्योंकि वे लोग यहूदी और इजरायल के नागरिक थे।’
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इजरायल के मंत्री ने कहा, ‘यह स्वीकार नहीं किया जा सकता। वेटिकन सिटी ने अपने बयान में मुख्य तौर पर गाजा के नागरिकों को लेकर ही चिंता जताई है। ऐसा तब हुआ है, जब इजरायल के 1300 लोगों की हत्याएं हो गईं और हम उसका दुख मना रहे हैं।’ इजरायली अथॉरिटीजन का कहना है कि हमास ने उसके 155 नागरिकों को बंधक बना लिया है। इन बंधकों में अमेरिका और ब्रिटेन के भी कुछ लोग शामिल हैं। कहा जा रहा है कि हमास के आतंकी इन लोगों को गाजा पट्टी में बनाई गई सुरंगों में ले जाकर छिपे हैं। इसके चलते इन्हें छुड़ा पाना इजरायल के लिए मुश्किल हो रहा है।
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बेंजामिन नेतन्याहू के मंत्री का कहना था कि पोप फ्रांसिस के बयान में मारे गए इजरायली लोगों के लिए साफ तौर पर संवेदना तक व्यक्त नहीं की गई। वहीं गाजा को लेकर चिंता जाहिर की गई है। वहीं वेटिकन सिटी के एक अधिकारी ने कहा कि पोप फ्रांसिस तो गाजा और इजरायल के बीच शांति के लिए मध्यस्थ के तौर पर काम करने के लिए भी तैयार हैं।
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